उत्तराखंड

कर्णप्रयाग में भाजपा के लिए अपनों ने ही खड़ी की मुश्किलें: अस्पताल और स्कूल के मुद्दे पर उठने लगे बगावती सुर

उत्तराखंड की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट को हमेशा से भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला माना जाता रहा है, लेकिन आगामी चुनावों से ठीक पहले पार्टी को विपक्षी दलों से कहीं ज्यादा अपनों के ही तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो साल 2002 से 2022 तक हुए कुल पांच विधानसभा चुनावों में से चार बार यहां की जनता ने भाजपा पर अपना अटूट भरोसा जताया है।

केवल 2012 के चुनाव में कांग्रेस के दिवंगत नेता डॉ. एपी मैखुरी को यहां से जीत नसीब हुई थी। हालांकि, इस बार की जमीनी हकीकत पार्टी के लिए काफी चिंताजनक होती जा रही है। स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव और सरकारी वादों के पूरा न होने को लेकर भाजपा के ही वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी सड़कों पर उतरकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। सिमली में एक सर्वसुविधायुक्त बेस अस्पताल के निर्माण की मांग को लेकर चल रहे व्यापक जन आंदोलन का नेतृत्व कोई और नहीं, बल्कि भाजपा के ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य और मंडल महामंत्री देवेंद्र सिंह नेगी कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दे दी है कि यदि अस्पताल की सौगात नहीं मिली, तो वह पार्टी से इस्तीफा देने में जरा भी संकोच नहीं करेंगे।

स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और विकास के मोर्चे पर भी सत्ताधारी दल को अपने ही नेताओं से असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा के नैनीसैंण स्थित इंटर कॉलेज में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की भारी कमी को लेकर भाजपा के सोशल मीडिया विभाग के पदाधिकारी और भाजयुमो के पूर्व ग्रामीण मंडल अध्यक्ष राकेश नेगी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वह शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर बीते 28 सितंबर से नंगे पांव चलकर अपना विरोध जता रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी भी गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र के समग्र विकास और वहां प्रस्तावित झील निर्माण जैसी सरकारी घोषणाओं के अधूरा रहने पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं।

भाजपा के अंदर मचे इस घमासान पर विपक्षी दल कांग्रेस भी पूरी तरह से हमलावर है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ने राज्य की भाजपा सरकार को जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल करार दिया है। वहीं, अपनों के इन बगावती सुरों को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश में चमोली के भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल का कहना है कि जनता की समस्याओं को उठाना एक सकारात्मक बात है।

संगठन और विधायक इन सभी मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री से लगातार संपर्क में हैं। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को यह नसीहत भी दी है कि वे अपनी शिकायतें सार्वजनिक रूप से उठाने के बजाय पार्टी के उचित मंच (फोरम) पर रखें।

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