
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद ने जोरदार पलटवार किया है। दोनों मंत्रियों ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए 2017 से पहले की सपा सरकार और 2017 के बाद की योगी सरकार के कार्यकाल के बीच तुलनात्मक अंतर भी बताया।
गठबंधन और दगे हुए कारतूसों पर वार
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर सुभासपा को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने सुभासपा के सिंबल पर अपने 12 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया था। शनिवार को सपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर राजभर ने तीखा तंज कसते हुए उन्हें ‘दगे हुए कारतूस’ बताया और कहा कि ऐसे नेताओं के साथ गठबंधन से वोट नहीं मिलते हैं।
शिक्षा, मोबाइल और निवेश पर घेराबंदी
अखिलेश यादव द्वारा बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल और शिक्षा को लेकर की गई टिप्पणियों पर राजभर ने कहा कि बच्चों को मोबाइल की जगह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षा के बिना रोजगार संभव नहीं है। निवेश के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान यूपी में कोई निवेशक नहीं आता था, लेकिन योगी सरकार में सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियाँ आ रही हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
नौकरियों की बोली और शिवपाल चाचा पर तंज
राजभर ने सपा सरकार पर भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय नौकरियों की बोलियां लगती थीं, और बिना पैसे के कोई नौकरी नहीं मिलती थी। उन्होंने तंज कसा कि सपा सरकार में “शिवपाल चाचा एंड कंपनी” सक्रिय हो जाती थी। इसके विपरीत, राजभर ने दावा किया कि योगी सरकार ने बिना किसी पक्षपात के 10 लाख योग्य युवाओं को नौकरियां दी हैं।
सपा सरकार में दंगे बनाम योगी सरकार में शांति
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव के 5 साल के शासनकाल में 1000 से अधिक दंगे हुए, जबकि योगी सरकार के 10 सालों में एक भी दंगा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सपा शासन में गुंडे-माफिया खुलेआम घूमते थे, जो अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।
अयोध्या दौरे पर संजय निषाद का कटाक्ष
कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने अखिलेश यादव के संभावित अयोध्या दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें भगवान श्रीराम के साथ निषादराज के भी दर्शन करने चाहिए और अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए। संजय निषाद ने जनता से अपील की कि वे 2017 से पहले और 2017 के बाद की सरकारों की तुलना करें, ताकि उन्हें सच्चाई साफ-साफ नजर आ सके।




