
उत्तर प्रदेश के आगरा में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यहाँ बल्केश्वर महादेव मंदिर से दर्शन कर लौट रही एक 50 वर्षीय विवाहिता को उसके परिचित ऑटो चालक ने दरिंदगी का शिकार बनाया।
10 अगस्त की इस घटना में आरोपी ऑटो चालक ने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर महिला को अगवा किया, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर बेरहमी से उसका गला रेतकर उसे मरणासन्न हालत में सड़क पर फेंक दिया। इस खौफनाक वारदात के बाद पीड़िता को न्याय के लिए भी दर-दर भटकना पड़ा, क्योंकि पुलिस लंबे समय तक थानों के सीमा विवाद का बहाना बनाकर मामले को टालती रही।
खौफनाक वारदात का ब्यौरा देते हुए ट्रांस यमुना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने बताया कि जब वह दर्शन के बाद वाटर वर्क्स चौराहे पर पहुंची, तो वहां पहले से परिचित टेढ़ी बगिया निवासी ऑटो चालक कृष्णा मिल गया। उसने घर छोड़ने के बहाने महिला को ऑटो में बैठा लिया, जिसमें कृष्णा का एक साथी पहले से ही मौजूद था। रास्ते में भाटिया पेट्रोल पंप के पास कृष्णा ने अचानक ऑटो को श्मशान घाट की तरफ एक सुनसान इलाके में मोड़ दिया। वहां ले जाकर दोनों ने महिला की ही साड़ी से उसका गला दबाने की कोशिश की और चाकू की नोक पर उसके साथ बारी-बारी से दरिंदगी की। जब महिला ने इस घिनौने कृत्य का विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर चाकू से कई जानलेवा वार किए और उसका गला रेत दिया।
इसी बीच गश्त करती पुलिस की गाड़ी के सायरन की आवाज सुनकर दोनों दरिंदे महिला को अधमरी और लहूलुहान हालत में सड़क किनारे फेंककर मौके से फरार हो गए। संयोगवश वहां से गुजर रही पुलिस ने पीड़िता को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, जहां गंभीर हालत में होने के कारण उसे करीब चार दिन बाद होश आया। लेकिन पीड़िता की असली मानसिक प्रताड़ना अस्पताल से निकलने के बाद शुरू हुई। जब 16 अगस्त को वह न्याय की गुहार लेकर ट्रांस यमुना थाने पहुंची, तो वहां की पुलिस ने घटनास्थल को एत्माद्दौला थाना क्षेत्र का बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जब वह एत्माद्दौला थाने गई, तो वहां भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई और उसे एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाया जाता रहा।
पुलिस की इस संवेदनहीनता और ढुलमुल रवैये का सीधा फायदा दरिंदों को मिला। आरोपी और उसका साथी सामने आकर पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाने लगे और उसे गंभीर धमकियां देने लगे। थानों के चक्कर काटकर हताश हो चुकी पीड़िता ने अंततः न्याय की आस में आगरा के पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) के दरवाजे पर दस्तक दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त के सख्त आदेश पर मंगलवार को, यानी घटना के करीब डेढ़ महीने बाद, जाकर इस जघन्य अपराध की प्राथमिकी दर्ज की जा सकी है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले में अपनी लापरवाही छिपाते हुए पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि शुरुआत में महिला द्वारा दी गई तहरीर में दुष्कर्म का स्पष्ट जिक्र नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि अब पीड़िता के विस्तृत बयान के आधार पर मुक़दमे में सामूहिक दुष्कर्म और अन्य संबंधित धाराएं बढ़ाई जाएंगी।



