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चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और BCCI के बीच तल्खी की इनसाइड स्टोरी: बुमराह की कप्तानी से शुरू हुआ मतभेद, रोहित शर्मा के भविष्य पर भी खिंचीं तलवारें

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सीनियर पुरुष चयन समिति के चेयरमैन अजीत अगरकर के कार्यकाल को लेकर जारी सस्पेंस के बीच बोर्ड और उनके बीच उपजे कथित मतभेदों की परतें खुलने लगी हैं। अगरकर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मुख्य चयनकर्ता के रूप में अपने कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं और उन्होंने इस संबंध में बीसीसीआई को औपचारिक रूप से अवगत भी करा दिया है।

उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर की शुरुआत में समाप्त हो रहा है। यूं तो हाल के दिनों में अगरकर के पद छोड़ने को भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के सीमित ओवरों के भविष्य को लेकर उपजे विवाद से जोड़ा जा रहा था, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चयन समिति और बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के बीच तल्खी की नींव साल 2023 में जसप्रीत बुमराह की कप्तानी को लेकर ही पड़ गई थी।

अजीत अगरकर ने 4 जुलाई 2023 को सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष का पदभार संभाला था। ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यभार संभालने के बाद अगरकर की दूसरी ही आधिकारिक चयन बैठक में बोर्ड के साथ उनका पहला वैचारिक टकराव हुआ। यह मामला अगस्त 2023 के आयरलैंड दौरे के लिए टी20 टीम के कप्तान के चयन से जुड़ा था। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पीठ की गंभीर चोट और लंबी सर्जरी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर रहे थे। अगरकर का दृढ़ मत था कि बुमराह के वर्कलोड और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए उन पर कप्तानी का अतिरिक्त दबाव नहीं डाला जाना चाहिए, इसलिए उन्होंने युवा बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ को टीम की कमान सौंपने का प्रस्ताव रखा था।

हालांकि, बीसीसीआई प्रबंधन इस बात पर अड़ा रहा कि बुमराह खुद टीम का नेतृत्व करने के इच्छुक हैं, इसलिए उन्हें ही कमान मिलनी चाहिए। आखिरकार बोर्ड की चली और बुमराह की कप्तानी में भारत ने वह सीरीज 2-0 से जीती, लेकिन इस फैसले ने चयनकर्ता और बोर्ड के बीच असहमति के बीज बो दिए थे।

समय के साथ यह खींचतान और बढ़ती गई, जिसका सबसे बड़ा असर अगरकर के कार्यकाल के अंतिम महीनों में रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर देखने को मिला। 2027 वनडे विश्व कप की योजनाओं में रोहित शर्मा की भूमिका को लेकर चयन समिति और बोर्ड के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आने लगे। सितंबर की शुरुआत में बीसीसीआई की एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अगरकर शामिल नहीं हुए थे।

हालांकि, बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने उस समय स्पष्टीकरण दिया था कि अगरकर शहर से बाहर थे और बैठक बहुत कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी, लेकिन क्रिकेट गलियारों में इसे मतभेदों की पुष्टि के तौर पर देखा गया। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगरकर ने फरवरी में ही बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों से कह दिया था कि वे उनके मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद नए विकल्प की तलाश शुरू कर दें।

अब इस बात को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर हैं कि क्या अगरकर को पद से हटाया जा रहा था या उन्होंने स्वेच्छा से इसे छोड़ा है। सूत्रों का कहना है कि बीसीसीआई भी उन्हें सेवा विस्तार देने के बहुत ज्यादा पक्ष में नहीं था और इस पर स्पष्ट रुख अपनाने में टालमटोल कर रहा था। वहीं, अन्य रिपोर्टों के अनुसार अगरकर ने खुद ही आगे काम न करने का मन बना लिया था।

हाल ही में संपन्न हुई बीसीसीआई की 95वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में चयन समिति से जुड़े सभी निर्णय लेने के अधिकार बोर्ड के प्रमुख पदाधिकारियों को सौंप दिए गए थे। अब चूंकि अगरकर ने सेवा विस्तार न लेने का अंतिम फैसला कर लिया है, इसलिए बीसीसीआई को जल्द ही भारतीय क्रिकेट टीम की सीनियर पुरुष चयन समिति के नए मुख्य चयनकर्ता की खोज प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

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