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सोनिया गांधी ने 1980 की मतदाता सूची प्रविष्टि पर पुनर्विचार याचिका में जवाब दाखिल किया; अगली सुनवाई 21 फरवरी को

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने दिल्ली राउज़ एवेन्यू कोर्ट में एक आपराधिक पुनरीक्षण मामले में विस्तृत जवाब दाखिल किया है। याचिका में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा 1980 की मतदाता सूची में उनके कथित नाम को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने से इनकार करने को चुनौती दी गई है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अगली सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की है। अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर न्यायालय ने 9 दिसंबर, 2025 को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। इससे पहले, 11 सितंबर को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने प्रारंभिक चरण में ही शिकायत को खारिज कर दिया था, यह मानते हुए कि उठाए गए मुद्दे आपराधिक कार्रवाई के योग्य नहीं हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि उन्होंने 1983 में ही भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। याचिका के अनुसार, 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और अगले वर्ष फिर से शामिल कर दिया गया। इसी आधार पर याचिका में आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई है, जिसमें पूर्व में मतदाता सूची में नाम शामिल करने में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

अपने जवाब में सोनिया गांधी ने पुनर्विचार का विरोध करते हुए इसे भ्रामक, निरर्थक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि वह उन सवालों को दोबारा न खोले जो उनके अनुसार आपराधिक न्यायनिर्णय के दायरे से बाहर हैं। जवाब में यह तर्क दिया गया है कि शिकायतकर्ता प्राथमिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहा है, इसके बजाय वह अनुमानों और सार्वजनिक रूप से प्रसारित सामग्री पर निर्भर है। इसमें यह तर्क दिया गया है कि स्पष्ट रूप से पहचाने गए कृत्यों, दस्तावेजों या वैधानिक उल्लंघनों के अभाव में आपराधिक दायित्व लागू नहीं किया जा सकता है।

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