
क्रिकेट के प्रशंसक याद करते हैं वो पुराने दिन—जब विश्व कप का शेड्यूल प्रिंट करके दोस्तों के बीच बाँटा जाता था, सिर्फ मैचों की उत्सुकता होती थी, न कि राजनीति या बॉयकॉट की। सचिन बनाम शोएब की बातें होती थीं, अंडरडॉग टीमों के चमत्कार की उम्मीद। IPL आने से पहले क्रिकेट शुद्ध आनंद था—परिवार, पड़ोसी, स्कूल सब मैचों के इर्द-गिर्द घूमते थे।
लेकिन अब T20 विश्व कप 2026 शुरू हो रहा है—20 टीमें, भारत और श्रीलंका सह-मेजबान, 7 फरवरी से 8 मार्च तक। कोलंबो के SSC से पाकिस्तान vs नीदरलैंड्स से शुरुआत, मुंबई के वानखेड़े, कोलकाता के ईडन गार्डन्स, अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे मैदानों पर खेल। यह बड़ा टूर्नामेंट है, जिसमें नए देश जैसे इटली (डेब्यू), नेपाल, USA, स्कॉटलैंड (बांग्लादेश की जगह) शामिल हैं।
इटली की टीम प्रवासियों से बनी है—श्रीलंका से आए क्रिशन कलुगामेज, पंजाब से जसप्रीत सिंह जैसे खिलाड़ी, जो पिज्जा बनाने या पढ़ाने के साथ क्रिकेट खेलते हैं। नेपाल की जीवंत वापसी, USA 2024 के जायंट-किलिंग को दोहराना चाहता है। ये कहानियाँ विश्व कप की असली खूबसूरती हैं—माइग्रेशन, सपने, संघर्ष।
फिर भी, टूर्नामेंट की हवा भारी है। बांग्लादेश ने भारत में सुरक्षा चिंताओं से खेलने से इनकार किया, ICC ने उन्हें हटा दिया और स्कॉटलैंड को जगह दी। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच (15 फरवरी, कोलंबो) बॉयकॉट करने का फैसला किया—बांग्लादेश के समर्थन में। ICC और PCB में बातचीत चल रही है, लेकिन राजनीति फिर से मैदान पर छा गई है। हाइब्रिड मॉडल, हैंडशेक-गेट जैसे पिछले विवाद याद आते हैं।
क्या पिच की शुद्धता बोर्डरूम की आवाज को दबा पाएगी? खेल शुरू हो रहा है—उम्मीद है, जादू वापस आएगा।



