ईडी की I-PAC पर छापेमारी: दिल्ली से कोलकाता तक टीएमसी का विरोध, महुआ मोइत्रा सहित सांसद हिरासत में

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कोलकाता ऑफिस और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के बाद राजनीतिक बवाल मच गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इसे चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति और डेटा चुराने की साजिश बताया, जबकि केंद्र सरकार ने इसे कोल तस्करी घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा करार दिया।

दिल्ली में टीएमसी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। इसमें महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ’ब्रायन, कीर्ति आजाद, साकेत गोखले, प्रतिमा मोंडल, सताब्दी रॉय सहित आठ सांसद शामिल थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और संसद स्ट्रीट थाने ले गई, लेकिन कुछ समय बाद रिहा कर दिया।

महुआ मोइत्रा ने कहा, “ईडी का दुरुपयोग कर गृह मंत्रालय हमारी पार्टी की चुनावी रणनीति और डेटा चुराना चाहता है। ममता बनर्जी शेरनी हैं, उन्होंने हमारी संपत्ति की रक्षा की।” कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास ममता बनर्जी से सीधे मुकाबला करने की हिम्मत नहीं है।

कोलकाता में भी टीएमसी ने बड़े पैमाने पर विरोध किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज (9 जनवरी) दोपहर 2 बजे जादवपुर से हाजरा तक विरोध मार्च निकाला। उन्होंने ईडी पर पार्टी के गोपनीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की लिस्ट जब्त करने का आरोप लगाया।

टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छापेमारी को अवैध बताया और जब्ती रद्द करने की मांग की। वहीं, ईडी ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई जारी है।

भाजपा ने ममता पर जांच बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संवैधानिक मशीनरी का ब्रेकडाउन है। पार्टी का दावा है कि छापेमारी कोल तस्करी घोटाले से जुड़ी है और I-PAC को अवैध फंड मिले थे।

यह विवाद 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गरमाया है, जहां I-PAC टीएमसी की चुनावी रणनीति संभाल रही है।

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