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ग्रेटर नोएडा में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत:, 1 घंटे तक जिंदा रहा – डिलीवरी एजेंट ने खुद कूदकर की कोशिश

ग्रेटर नोएडा में कोहरे वाली शुक्रवार रात एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार पानी भरी खाई में गिरने से मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस, नोएडा अथॉरिटी और प्रशासन की तरफ से कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि जब युवक लगभग एक घंटे तक जिंदा था और मदद मांग रहा था, तो रेस्क्यू ऑपरेशन में इतनी देरी क्यों हुई?

हादसे का पूरा घटनाक्रम

युवक की कार शुक्रवार रात कोहरे के कारण अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी गहरी पानी भरी खाई में गिर गई। आंखों देखी गवाहों और परिवार के अनुसार, युवक हादसे के बाद करीब एक घंटे तक जिंदा रहा। वह बार-बार मदद के लिए चिल्लाता रहा और पास से गुजरने वालों को हाथ हिलाकर सिग्नल देता रहा, लेकिन कार धीरे-धीरे पानी में डूबती गई।

डिलीवरी एजेंट मोनिंदर की बहादुरी

घटना के समय मौके पर मौजूद डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बताया कि वह करीब 1:45 बजे स्पॉट पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि रेस्पॉन्डर्स में हिचकिचाहट थी, तो उन्होंने खुद कमर में रस्सी बांधकर पानी में कूद गए।
मोनिंदर ने बताया, “मैंने युवक और उसकी कार की तलाश करीब 30 मिनट तक की। मैंने पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक कार पूरी तरह डूब चुकी थी। अगर शुरुआत में ही तेज और निर्णायक रेस्क्यू होता, तो शायद युवक की जान बच सकती थी।”

प्रशासन की कार्रवाई और सवाल

हादसे के बाद पुलिस ने इलाके के प्रॉपर्टी डीलर्स को बुक किया है। नोएडा अथॉरिटी ने एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया है और ट्रैफिक से जुड़े कामों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
लेकिन मुख्य सवाल यह है – जब युवक जिंदा था और मदद मांग रहा था, तो स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड या अन्य रेस्क्यू टीमों की ओर से तुरंत और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? गवाहों का कहना है कि शुरुआती घंटों में देरी ने जानलेवा साबित हो गया।

यह घटना एक बार फिर ग्रेटर नोएडा में सड़क सुरक्षा, खाई-नालों की देखभाल और आपातकालीन रेस्पॉन्स सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। परिवार और स्थानीय लोग जांच की मांग कर रहे हैं कि किसकी लापरवाही से युवक की जान गई।

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