उत्तर प्रदेश

यूपी में 15 अक्तूबर से फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, नए चक्रवाती तंत्र से बारिश के आसार; फसलों को भारी नुकसान और दो किसानों की मौत

उत्तर प्रदेश में मंगलवार और बुधवार को मौसम के सामान्य रहने और आसमान साफ होने से लोगों को बारिश से तात्कालिक राहत मिलने की उम्मीद है। धूप खिलने से दिन के पारे में एक से दो डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़त दर्ज की जा सकती है, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार, 15 अक्तूबर से प्रदेश में एक नया चक्रवाती तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे मौसम एक बार फिर करवट लेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू होने वाला यह मौसमी बदलाव 16 और 17 अक्तूबर को मध्य यूपी, अवध और बुंदेलखंड होते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिस्सों तक फैल सकता है।

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, इस नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 15 से 17 अक्तूबर के दौरान राज्य के दोनों हिस्सों में छिटपुट बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला देखने को मिलेगा। इस दौरान दिन के तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी, जिससे वातावरण में हल्की ठंडक महसूस होगी। इससे पूर्व सोमवार को आगरा और फतेहपुर 34.5 डिग्री सेल्सियस के अधिकतम तापमान के साथ पूरे प्रदेश में सबसे गर्म जिले दर्ज किए गए थे।

इस बीच, लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है और इससे जान-माल का भी गंभीर नुकसान हुआ है। हाथरस में एक शिव मंदिर में पूजा कर रहे 45 वर्षीय किसान महेश चंद्र दीक्षित पर आकाशीय बिजली गिरने से उनकी मौत हो गई, जबकि अलीगढ़ में बारिश से बर्बाद हुई अपनी फसल को देखने पहुंचे 50 वर्षीय किसान ओमवीर सिंह की सदमे से जान चली गई।

यह बिन मौसम बरसात धान और गन्ने की नकदी फसलों के लिए आफत साबित हो रही है। बारिश और तेज हवाओं के कारण गन्ने की फसल गिरकर तिरछी हो गई है, जिससे उत्पादन में लगभग तीन फीसदी तक की गिरावट का अनुमान है। गन्ने की गुणवत्ता प्रभावित होने से चीनी मिलों में रिकवरी का संकट गहराएगा, जिसके चलते आगामी पेराई सत्र एक सप्ताह तक पीछे खिसक सकता है। दूसरी तरफ, अलीगढ़ सहित पश्चिमी यूपी की मंडियों में धीमी खरीद प्रक्रिया के चलते खुले आसमान के नीचे पड़ा हजारों मीट्रिक टन धान बारिश में भीग गया है।

खेत, खलिहान और मंडियों में सुरक्षित स्थान न मिलने के कारण करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान भीगकर खराब हो चुका है, जिससे किसानों और आढ़तियों की चिंताएं चरम पर हैं।

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