
संयुक्त राष्ट्र में चीन ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में किसी भी सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर “बहुत जोरदार हमला” करने की चेतावनी के बाद आई है। चीन ने साफ कहा कि युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति ही संकट का समाधान है।
चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि सदस्य देशों को सैन्य कार्रवाई की अनुमति देना गलत होगा। इससे बल के अवैध इस्तेमाल को कानूनी मान्यता मिलेगी। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत सैन्य अभियान रोकने और शांति वार्ता शुरू करने की अपील की।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी जोर देकर कहा कि सैन्य तरीके किसी समस्या का मूल समाधान नहीं हैं। संघर्ष बढ़ाने से किसी भी पक्ष को फायदा नहीं होगा। उन्होंने अमेरिका और संबंधित देशों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता चुनने की सलाह दी।
ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अमेरिका अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर “extremely hard” हमले करेगा और उसे “stone age” में भेज देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सैन्य लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं, लेकिन अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो हमले जारी रहेंगे। ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन का इरादा नहीं होने का भी दावा किया।
चीन ने इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा है। बीजिंग ने सभी पक्षों से तुरंत युद्धविराम करने और संवाद के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की है।




