
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “हम दलाल राष्ट्र नहीं बन सकते।”
जयशंकर का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच “अर्थपूर्ण और निर्णायक” बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विपक्ष ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश पर चिंता जताई थी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई प्रमुख मंत्री और कांग्रेस, सपा, जेडीयू, सीपीएम सहित विपक्षी दलों के नेता मौजूद थे।
जयशंकर ने साफ कहा कि भारत किसी भी वैश्विक मुद्दे पर पाकिस्तान की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं कर सकता।
पृष्ठभूमि
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा था कि अगर दोनों पक्ष सहमत हों तो पाकिस्तान बातचीत की मेजबानी कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शरीफ के इस बयान को शेयर किया था। हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी भी बातचीत से इनकार किया है।
युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।



