
अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में 2003 इराक आक्रमण के बाद सबसे बड़ी वायु शक्ति जुटाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, F-35, F-22, F-15 और F-16 जैसे एडवांस फाइटर जेट्स, कमांड-एंड-कंट्रोल एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस सिस्टम्स तैनात किए जा रहे हैं।
प्रमुख बिंदु:
- USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से क्षेत्र में मौजूद है, जबकि USS गेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप (4 डिस्ट्रॉयर्स सहित) रास्ते में हैं।
- कुल 13 अमेरिकी जहाज मिडिल ईस्ट और पूर्वी भूमध्य सागर में हैं, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता वाली नौसेना शामिल है।
- CNN और WSJ के अनुसार, अमेरिकी सेना इस वीकेंड से ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम फैसला नहीं लिया है।
- ट्रंप को कई ब्रिफिंग्स मिली हैं, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल्स और प्रॉक्सी ग्रुप्स पर स्ट्राइक्स के विकल्प शामिल हैं।
- जेनेवा में अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, जहां कुछ प्रगति हुई लेकिन प्रमुख मुद्दों पर दूरी बनी हुई है। ईरान ने न्यूक्लियर हथियार न बनाने का दावा किया है, जबकि ट्रंप पूर्ण समाप्ति चाहते हैं।
- ईरान ने अमेरिकी धमकियों को कमतर आंकते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अभ्यास किया और रूस के साथ संयुक्त ड्रिल की योजना बनाई है।
यह तैनाती क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकती है, जबकि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ट्रंप प्रशासन डिप्लोमेसी को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन बल का विकल्प टेबल पर है।



