
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान नेपाल से शादी करके आईं हजारों महिलाओं के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। ये महिलाएं भारत की वैध निवासी तो हैं, लेकिन भारतीय नागरिक नहीं होने के कारण मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं करा पा रही हैं। इससे उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा।
सीमावर्ती जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में रोटी-बेटी के रिश्ते के कारण नेपाल की लड़कियों से शादियां आम हैं। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिकता अनिवार्य है। नेपाल से आई महिलाओं को भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत आवेदन करना पड़ता है, जिसमें 7 साल लगातार भारत में रहने का प्रमाण, विवाह पंजीकरण और अन्य दस्तावेज जरूरी हैं।
SIR में 2003 की वोटर लिस्ट से मैपिंग के कारण इन महिलाओं को माता-पिता के नाम और दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो नेपाल में हैं। कई जिलों में 15 हजार से ज्यादा नेपाली मूल की महिलाओं को नोटिस जारी हुए हैं, और उनके नाम पेंडिंग या हटाए जा सकते हैं। हालांकि, ऐसे दंपतियों के बच्चे (तय शर्तों पर) भारतीय नागरिक माने जाते हैं और वोटर बन सकते हैं।
नागरिकता कैसे मिलेगी?
- 7 साल लगातार निवास प्रमाण
- विवाह प्रमाण पत्र
- जिलाधिकारी/गृह विभाग के माध्यम से प्रक्रिया
यह प्रक्रिया पूरी होने तक वे वोट नहीं डाल पाएंगी। कई जगहों पर राहत की मांग उठ रही है, लेकिन फिलहाल नियम सख्त हैं।



