
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की, लेकिन कई प्रमुख सहयोगियों ने इनकार कर दिया। ट्रंप ने मंगलवार को गुस्से में कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं, हम दुनिया की सबसे मजबूत सेना वाले देश हैं। उन्होंने नाटो सदस्यों की आलोचना की कि वे मदद नहीं करते, जबकि अमेरिका उन्हें सुरक्षा देता है।
ट्रंप ने कहा कि अपील से सहयोगियों की प्रतिक्रिया जांचना था, क्योंकि जरूरत पड़ने पर वे साथ नहीं देंगे। जर्मनी, स्पेन और इटली ने मना कर दिया। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले कोई परामर्श नहीं हुआ और जर्मनी के पास यूएन, ईयू या नाटो की मंजूरी नहीं है।
ट्रंप ने ब्रिटेन की भी आलोचना की कि युद्ध शुरू होने पर दो एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने से मना किया, लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद पेशकश की, जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया।
यह मामला पश्चिम एशिया युद्ध से जुड़ा है, जहां अमेरिका-इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई नेता मारे गए। ईरान ने जवाबी हमले किए और होर्मुज बंद कर दिया, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान के नए लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा कि जलडमरूमध्य बंद रहेगा और तेल कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना से कमर्शियल जहाजों को एस्कॉर्ट करने को कहा, लेकिन सहयोगी देशों ने शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष में दरार उजागर हुई है।



