
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मेनका गांधी के आवारा कुत्तों से जुड़े बयानों की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि उनके टिप्पणियां अदालत के आदेशों के खिलाफ हैं और अवमानना (contempt of court) के दायरे में आती हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेनका गांधी के पॉडकास्ट और अन्य बयानों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, “आपकी मुवक्किल ने बिना सोचे-समझे तरह-तरह की टिप्पणियां की हैं। अजमल कसाब ने भी अवमानना नहीं की, लेकिन आपकी क्लाइंट ने की है।” हालांकि, अदालत ने अपनी उदारता दिखाते हुए अभी अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की।
यह मामला आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े स्वत: संज्ञान याचिका के दौरान सामने आया, जहां कोर्ट ने पहले जन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट ने मेनका गांधी से सवाल भी किया कि मंत्री रहते उन्होंने बजट आवंटन में क्या योगदान दिया।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे बयान जारी रहने पर आगे कार्रवाई हो सकती है।



