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संचार साथी ऐप विवाद: ‘पूरी तरह वैकल्पिक, डिलीट कर सकते हैं’, ज्योतिरादित्य सिंधिया की सफाई से विपक्ष के ‘निगरानी’ आरोपों पर लगी लगाम

दूरसंचार विभाग (DoT) के 28 नवंबर को जारी दिशा-निर्देशों से भड़के संचार साथी ऐप विवाद पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को संसद के बाहर स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है और उपयोगकर्ता इसे किसी भी समय डिलीट कर सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के ‘जासूसी टूल’ और ‘पेगासस प्लस प्लस’ जैसे आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य केवल उपभोक्ता सुरक्षा है, न कि निगरानी।

सिंधिया ने कहा, “अगर आप संचार साथी नहीं चाहते, तो डिलीट कर दें। यह पूरी तरह आप पर निर्भर है। रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक है, और ऐप एक्टिवेट करने या डीएक्टिवेट करने का अधिकार भी यूजर का है।” उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए बोले, “जब विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं होता, तो वे जबरदस्ती विवाद खड़ा करते हैं। हमारी जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”

दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर को सभी स्मार्टफोन निर्माताओं और आयातकों को निर्देश दिया था कि 1 दिसंबर 2025 के बाद भारत में बिक्री के लिए तैयार सभी नए मोबाइल हैंडसेट्स पर संचार साथी ऐप पूर्व-स्थापित हो। कंपनियों को 90 दिनों के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, और 120 दिनों में रिपोर्ट जमा करनी होगी। निर्देश में कहा गया कि ऐप सेटअप के दौरान आसानी से दिखना चाहिए और इसकी कार्यक्षमता को निष्क्रिय या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। लेकिन सिंधिया ने स्पष्ट किया कि पूर्व-स्थापना केवल सुविधा के लिए है, अनिवार्य उपयोग नहीं। “यह अन्य ऐप्स जैसा ही है—यूजर इसे डिलीट कर सकता है। ऐप कोई जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग नहीं करता।”

सिंधिया ने ऐप के लाभों पर जोर देते हुए आंकड़े पेश किए। संचार साथी पोर्टल को अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर चुके हैं, जबकि ऐप के 1.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। इसकी मदद से 1.75 करोड़ से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए, 20 लाख चोरी हुए फोन ट्रेस हुए, और 7.5 लाख से ज्यादा फोन मालिकों को लौटाए गए। मंत्री ने कहा, “यह ऐप सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) से जुड़ा है, जो आईएमईआई धोखाधड़ी, चोरी फोन ट्रैकिंग और साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग में मदद करता है।”

विपक्ष ने आदेश को ‘गोपनीयता पर हमला’ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे ‘पेगासस प्लस प्लस’ कहा, जबकि राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘बिग बॉस निगरानी’ का आरोप लगाया। सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने व्यंग्य किया कि अगला कदम ‘ब्रेन इम्प्लांट्स’ होगा। लेकिन सिंधिया ने इन दावों को ‘गलतफहमी’ बताया और कहा कि ऐप की अनुमतियां सीमित हैं—कोई कैमरा, माइक या लोकेशन एक्सेस नहीं। एक रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल इस आदेश का विरोध कर रही है, क्योंकि यह iOS की गोपनीयता नीतियों से टकराता है।

यह विवाद संसद के शीतकालीन सत्र में बहस का विषय बन चुका है, जहां गोपनीयता बनाम सुरक्षा का सवाल उठ रहा है। सिंधिया का बयान राहत देने वाला है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि निर्देश में ‘निष्क्रिय न करने’ की शर्त से अस्पष्टता बनी हुई है। ऐप जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था और अब तक 50 लाख डाउनलोड्स पार कर चुका है। सरकार का दावा है कि यह फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी है, लेकिन आलोचक सार्वजनिक परामर्श की कमी पर सवाल उठा रहे हैं।

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