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जस्टिस सूर्यकांत कल लेंगे 53वें सीजेआई के रूप में शपथ: जस्टिस बीआर गवई का आज रिटायरमेंट, सात देशों के जजों का ऐतिहासिक समावेश

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का कार्यकाल आज, 23 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। उनकी जगह सोमवार, 24 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष शपथ लेंगे।

यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत की गई है, और जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 तक यह पद संभालेंगे। जस्टिस गवई, जो मई 2025 से पद पर थे और देश के पहले बौद्ध सीजेआई बने, ने जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी सिफारिश किया था।

यह शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक होगा, क्योंकि पहली बार सात देशों—भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका—के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों का ऐसा बड़ा समूह राष्ट्रपति भवन में शामिल होगा। ये प्रतिनिधि अपने परिवारों के साथ भारत पहुंच चुके हैं, जो कार्यक्रम को और भी खास बनाता है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और न्यायिक एकजुटता का प्रतीक बनेगा।

शपथ ग्रहण में भाग लेने वाले प्रमुख प्रतिनिधि इस प्रकार हैं: भूटान से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ल्योनपो नोरबू शेरिंग और उनकी पत्नी ल्हादेन लोटे; केन्या से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्था कूमे और सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुसान नजोकी एनडुंगु; मलेशिया से फेडरल कोर्ट जज जस्टिस तान श्री दातुक नलिनी पथमनाथन और उनकी पत्नी पसुपति शिवप्रगसम; मॉरीशस से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल और उनकी बेटी रेबेका हन्ना बीबी गुलबुल; नेपाल से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सपना प्रधान मल्ला और उनके पति अशोक बहादुर मल्ल, साथ ही पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज व वर्तमान कानून मंत्री अनिल कुमार सिन्हा और उनकी पत्नी उर्सिला सिन्हा; तथा श्रीलंका से मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी पद्मन सुरसेना और उनकी पत्नी सेपालिका सुरसेना, सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एस थुरैराजा और उनकी पत्नी शशिकला थुरैराजा, तथा जस्टिस एएचएमडी नवाज और उनकी पत्नी रिजान मोहम्मद ढीलीप नवाज।

जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव में 10 फरवरी 1962 को पैदा हुए। उन्होंने 1987 में हरियाणा ज्यूडिशियल सर्विसेज परीक्षा पास की और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 2011 में वे हाईकोर्ट के जज बने, 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने, और 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। वे हरियाणा से पहले सीजेआई होंगे। मई 2025 से वे नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (एनएएलएसए) के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। उनके कार्यकाल में इलेक्टोरल रिफॉर्म्स, क्रिमिनल जस्टिस और डिजिटल प्राइवेसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे अदालत के समक्ष आ सकते हैं।

जस्टिस गवई के कार्यकाल ने न्यायपालिका में समावेशिता को मजबूत किया, खासकर सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक अधिकारों पर। उनका रिटायरमेंट न्यायिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त कर रहा है।

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