उत्तर प्रदेशलखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी: शारदा नदी का कहर, ग्रंट 12 गांव में 10 और मकान ध्वस्त, युवती ने भागकर बचाई जान

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन तहसील क्षेत्र में स्थित ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी की कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार शाम से शुक्रवार सुबह तक 12 घंटे के भीतर 10 और मकान नदी की तेज धारा में समा गए। अब तक इस गांव के 101 मकान शारदा नदी की भेंट चढ़ चुके हैं।

शुक्रवार को कटान के दौरान एक दिल दहला देने वाली घटना में एक युवती बाल-बाल बची। वह अपने घर के बाहर खड़ी थी, तभी मकान भरभराकर नदी में गिर गया। युवती ने भागकर अपनी जान बचाई, और इस घटना का वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया।

प्रभावित परिवार और नुकसान

जिन परिवारों के मकान नदी में समा गए, उनमें रामश्री, चंद्रकली, डालचंद, महेश, लज्जावती, अभिषेक, शिवराम, शांतई, धर्मेंद्र और राधेश्याम शामिल हैं। हाल के दिनों में शारदा नदी ने गांव में भारी तबाही मचाई है, जिसमें 15 दिनों में 13 मकान और 50 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान के कारण उनकी पूरी गृहस्थी तबाह हो गई है, और वे खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के आरोप

बेघर हुए परिवारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्हें केवल मुआवजे का आश्वासन दिया जा रहा है, जो खानापूरी से ज्यादा कुछ नहीं। पीड़ितों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद न तो राहत सामग्री मिल रही है और न ही सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन का जवाब:

निघासन तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि कटानग्रस्त क्षेत्र पर नजर रखने के लिए लेखपाल को तैनात किया गया है। प्रशासन रोजाना शासन को रिपोर्ट भेज रहा है, और प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ये आश्वासन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे।

शारदा नदी की तबाही:

शारदा नदी का कटान इस क्षेत्र में लंबे समय से समस्या बना हुआ है। हाल के हफ्तों में बारिश और नेपाल से आने वाली अतिरिक्त जलधारा के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे कटान और तेज हो गया। इससे पहले भी अगस्त और सितंबर में कई मकान, मंदिर और फसलें नदी में समा चुकी हैं। ग्रंट नंबर 12 गांव का अस्तित्व अब खतरे में है, और लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

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