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बिहार चुनाव 2025: मोकामा हत्याकांड में जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह गिरफ्तार, पकड़े गए 2 अन्य सहयोगी ; इलाके में चरम पर तनाव

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पुराने सहयोगी और जन सुराज पार्टी प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी के समर्थक दुलारचंद यादव (76) की गुरुवार को हुई हत्या के मामले में जदयू प्रत्याशी और पूर्व विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार को शनिवार-रविवार दरम्यानी रात पटना पुलिस ने बाढ़ के कारगिल मार्केट से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के समय एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में करीब 150 पुलिसकर्मी अनंत सिंह के घर पहुंचे। सरेंडर की अफवाहों के बीच वे पहले से तैयार बैठे थे और बिना हंगामे के सफेद स्कॉर्पियो पर सवार हो पटना ले जाए गए। रात में ही उन्हें जेल भेज दिया गया, और रविवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। साथ ही, उनके दो सहयोगी मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी गिरफ्तार किया गया।

हत्याकांड का विवरण

गुरुवार दोपहर मोकामा टाल क्षेत्र के बसामनचक गांव के पास जन सुराज प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी के प्रचार काफिले में दुलारचंद यादव मौजूद थे। अनंत सिंह के काफिले से सामना होने पर दोनों पक्षों में तनाव हो गया, जो पथराव और मारपीट में बदल गया। दुलारचंद के पोते नीरज कुमार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में अनंत सिंह समेत चार (रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, छोटन सिंह, कंजय सिंह) नामजद हैं।

आरोप है कि अनंत सिंह ने पैर में गोली मारी और फिर गाड़ी से कुचल दिया। पियूष प्रियदर्शी ने भी छह लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई, जबकि पुलिस ने स्वतंत्र जांच के आधार पर एक और प्राथमिकी दर्ज की। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर (फेफड़े फटने और पसलियां टूटने से) की पुष्टि हुई, लेकिन गोली पैर में लगने की बात सही साबित हुई—मौत कुचलने से हुई।

अनंत सिंह ने हत्या से इनकार किया और इसे राजद प्रत्याशी वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह की साजिश बताया। उन्होंने कहा, “दुलारचंद पहले सूरजभान के साथ थे, यह उनका खेल है।” दुलारचंद 1990 के दशक के कुख्यात गैंगस्टर थे और अनंत सिंह के पुराने दुश्मन। हाल ही में वे जन सुराज से जुड़े थे।

गिरफ्तारी का राजनीतिक असर

यह गिरफ्तारी एनडीए के लिए बड़ा झटका है। अनंत सिंह मोकामा से जदयू प्रत्याशी थे, जहां वे 2005 से दबदबा रखते थे। पिछली बार एक विस्फोटक मामले में सजा मिलने पर विधायकी गई, फिर पत्नी नीलम देवी उपचुनाव जीतीं। पटना हाईकोर्ट से बरी होने के बाद वे लौटे, लेकिन चुनाव आयोग के निर्देश पर गिरफ्तारी हुई। शनिवार शाम वे 50 वाहनों के काफिले में प्रचार कर रहे थे। पियूष प्रियदर्शी ने कहा, “यह अच्छा कदम है, लेकिन देर से। अगर पहले गिरफ्तार होते तो बेहतर।”

हादसे के बाद मोकामा में तनाव चरम पर है। शुक्रवार को दुलारचंद के शव यात्रा के दौरान पथराव हुआ। चुनाव आयोग ने पटना एसपी (ग्रामीण) विक्रम सिहाग समेत तीन अधिकारियों का तबादला किया। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।

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