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दिल्ली में जहरीली हवा का कहर: प्रदूषण के चलते सरकारी-निजी दफ्तरों में 50% स्टाफ वर्क फ्रॉम होम

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया है, जिसके मद्देनजर दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-3 के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। सरकारी और निजी दोनों तरह के दफ्तरों में केवल 50 प्रतिशत स्टाफ को ही कार्यालय आने की अनुमति होगी, जबकि बाकी 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम – WFH) करेंगे। यह आदेश सोमवार (24 नवंबर 2025) को जारी किया गया, जो प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

इस उपाय से न केवल सड़कों पर वाहनों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि उत्सर्जन भी कम होगा, जो दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 पर पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जिसमें आनंद विहार में 440 का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।

आदेश के प्रमुख प्रावधान

  • लागू होने का दायरा: यह निर्देश दिल्ली सरकार के सभी कार्यालयों, निजी प्रतिष्ठानों और यहां कार्यरत केंद्रीय कार्यालयों पर लागू होगा। निजी दफ्तरों में 50% से अधिक स्टाफ को शारीरिक रूप से उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • वाहन उत्सर्जन पर नियंत्रण: वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन दिल्ली के कुल प्रदूषण में 21.6% योगदान देते हैं। इसके अलावा, कार्यालयों के लिए स्टैगर्ड टाइमिंग (विभिन्न समय पर काम शुरू करने) का भी सुझाव दिया गया है।
  • अन्य उपाय: GRAP स्टेज-3 के तहत निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध, औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती और कचरा जलाने पर रोक जैसे कदम पहले से लागू हैं। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार 24×7 निगरानी कर रही है।

प्रदूषण की बढ़ती चुनौती

दिल्ली में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण की समस्या चरम पर पहुंच जाती है। धुंध की परत से दृश्यता कम हो गई है, और PM2.5 व PM10 जैसे सूक्ष्म कणों का स्तर खतरनाक सीमा पार कर गया है। इससे सांस संबंधी बीमारियां, अस्थमा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाना (1.8% योगदान), वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन मुख्य कारण हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और CAQM की सिफारिशों के बाद GRAP के उपायों को मजबूत किया गया है।

यह फैसला न केवल कर्मचारियों की सेहत की रक्षा करेगा, बल्कि शहर की हवा को साफ करने में भी मददगार साबित होगा। हालांकि, लंबे समय के समाधान के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय जरूरी है।

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