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अमेरिकी पेंटागन रिपोर्ट: चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने ‘कोर इंटरेस्ट’ में किया शामिल

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की हालिया रिपोर्ट में चीन के अरुणाचल प्रदेश पर दावे को उसके ‘कोर इंटरेस्ट’ का हिस्सा बताया गया है, जो ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित क्षेत्रों के साथ रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, ये दावे चीन की 2049 तक ‘महान पुनरुत्थान’ (ग्रेट रिजुवेनेशन) की राष्ट्रीय रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस योजना के तहत चीन एक विश्व स्तरीय सैन्य शक्ति बनना चाहता है, जो युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम हो।

भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त किया है, लेकिन भविष्य में अरुणाचल प्रदेश नई टेंशन का केंद्र बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के नेतृत्व ने ‘कोर इंटरेस्ट’ की परिभाषा विस्तारित की है, जिसमें ताइवान, दक्षिण चीन सागर, सेनकाकू द्वीप और उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

भारत हमेशा से स्पष्ट कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश “था, है और हमेशा रहेगा” भारत का अभिन्न अंग। हाल के उदाहरणों में नवंबर 2025 में अरुणाचल की प्रेमा वांगजोम थोंगडोक को शंघाई एयरपोर्ट पर 18 घंटे हिरासत में रखा गया, क्योंकि चीनी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को अमान्य बताया – जन्मस्थान अरुणाचल होने के कारण। उन्हें भोजन और सुविधाओं से वंचित रखा गया। बाद में भारतीय दूतावास की मदद से वे आगे यात्रा कर सकीं।

इस सप्ताह एक भारतीय यूट्यूबर अनंत मित्तल को भी चीन में हिरासत में लिया गया, क्योंकि उन्होंने थोंगडोक का समर्थन करते हुए एक वीडियो में अरुणाचल को भारत का हिस्सा बताया था। उन्होंने दावा किया कि 15 घंटे हिरासत में उन्हें भोजन नहीं दिया गया।

अमेरिका का नोटिस महत्वपूर्ण

बीजिंग अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत (जांगनान) कहता है और 1914 की मैकमोहन लाइन को स्वीकार नहीं करता। खासकर तवांग पर चीन का दावा मजबूत है, पहले सिर्फ तवांग पर था, बाद में पूरे राज्य पर विस्तार किया। चीन समय-समय पर अरुणाचल में जगहों के नए नाम जारी करता है।

पूर्व राजनयिक महेश सचदेव ने कहा कि अमेरिका का अरुणाचल पर चीन की रणनीति नोट करना महत्वपूर्ण है। पहले अमेरिका लद्दाख पर विस्तार से रिपोर्ट करता था, लेकिन अरुणाचल पर चुप रहता था। अब यह जागरूकता दिखाता है कि चीन भारत के साथ अरुणाचल में दबाव की क्या रणनीति अपनाता है।

चीन की पाकिस्तान रणनीति

रिपोर्ट में भारत के लिए एक और चेतावनी है। एलएसी पर शांति चीन की लंबी अवधि की दोहरी रणनीति का हिस्सा है – सीमा पर सामरिक शांति बनाए रखते हुए पाकिस्तान के जरिए सैन्य दबाव जारी रखना। इससे भारत को वॉशिंगटन के करीब जाने से रोकना है।

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने ज्यादातर चीनी हथियार इस्तेमाल किए। रिपोर्ट कहती है कि एलएसी पर शांति से चीन भारत से संबंध स्थिर करना चाहता है और दिल्ली-वॉशिंगटन निकटता रोकना।

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