जगदीप धनखड़ का प्रोटोकॉल तोड़कर इस्तीफा, राष्ट्रपति भवन में इतने घंटे इंतजार
मानसून सत्र के पहले दिन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया। धनखड़ ने प्रोटोकॉल तोड़कर बिना पूर्व सूचना के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपने के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंच गए, जहां उन्हें आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया और अपने सरकारी आवास को खाली करने पहुंच गए। इस घटना ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। विपक्ष का दावा है कि इस्तीफा सरकार के दबाव में हुआ, जबकि सत्तापक्ष इसे स्वास्थ्य कारणों से जोड़कर कांग्रेस पर नाटकीयता का आरोप लगा रहा है।
राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के अनुसार, धनखड़ 21 जुलाई को सुबह 8:30 बजे बिना समय लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जिससे वहां अफरातफरी मच गई। अधिकारियों ने तुरंत राष्ट्रपति को सूचित किया, और करीब 30 मिनट बाद धनखड़ ने मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे के बाद उन्होंने इसे एक्स पर पोस्ट कर दिया, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 घंटे बाद एक्स पर धनखड़ के बेहतर स्वास्थ्य की कामना की, ताकि यह संदेश न जाए कि इस्तीफा दबाव में हुआ।
धनखड़ और सरकार के बीच तनाव की शुरुआत दिसंबर 2024 में हुई, जब उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में उन्होंने कहा था, “कृषि मंत्री जी, आपका एक-एक पल भारी है। क्या सरकार ने किसानों से कोई वादा किया था? अगर हां, तो उसे पूरा क्यों नहीं किया? किसान आंदोलन को सीमित समझना आपकी भूल होगी, क्योंकि सड़क पर न उतरे किसान भी चिंतित हैं।” इसके अलावा, अप्रैल 2025 में धनखड़ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की जिद की थी, जो प्रोटोकॉल के खिलाफ मानी गई।
धनखड़ के इस्तीफे के कारणों पर सस्पेंस बना हुआ है। उनके करीबी सूत्रों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, क्योंकि मार्च 2025 में उन्हें हृदय संबंधी समस्या हुई थी। लेकिन विपक्ष का दावा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस को जल्दबाजी में स्वीकार करने से सरकार नाराज थी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 21 जुलाई को धनखड़ ने दोपहर 12:30 बजे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में हिस्सा लिया, लेकिन शाम 4:30 बजे की बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की अनुपस्थिति से वे अपमानित महसूस कर इस्तीफा दे दिया। नड्डा ने जवाब दिया कि उनकी अनुपस्थिति की सूचना दी गई थी।