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पुतिन भारत दौरे का दूसरा दिन: S-500 और Su-57 पर चर्चा, रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई; जानें भारत-रूस के मजबूत रिश्तों का इतिहास

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिवसीय भारत दौरा आज अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, जो 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने का माध्यम बनेगा।

व्यापार, ऊर्जा और कूटनीतिक समझौतों के बीच रक्षा क्षेत्र प्रमुख एजेंडा है। सोवियत काल से चली आ रही साझेदारी आज भी भारत की 36% रक्षा आपूर्ति का स्रोत है। पुतिन-मोदी की बैठक में S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, Su-57 फाइटर जेट्स और अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट्स पर चर्चा होगी, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत की प्राथमिकता हैं। यूक्रेन संकट के बीच यह यात्रा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित करती है।

भारत-रूस रक्षा संबंध सोवियत युग से गहरे हैं, जब 1960-70 के दशक में MiG विमान, T-72 टैंक और BrahMos मिसाइल जैसी आपूर्तियां शुरू हुईं। 2021-31 सैन्य तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (MTC) ने अनुसंधान, उत्पादन और रखरखाव को मजबूत किया। 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद (2021 से) और IRIGC-MTC आयोग (2000 से) जैसे मंच सालाना समीक्षा सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान परियोजनाओं में T-90 टैंकों, Su-30MKI विमानों का लाइसेंस उत्पादन, Ka-31 हेलीकॉप्टर और AK-203 राइफलें शामिल हैं। INDRA अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेलों में सेनाओं का सहयोग भी निरंतर है।

पुतिन दौरे में भारत अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट्स (कुल 10 तक) की मांग करेगा, जो ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी हमलों को विफल करने में सफल साबित हुईं। S-400 (2018 का $5.43 बिलियन सौदा) में 5 रेजिमेंट्स हैं—3 डिलीवर हो चुकीं, 2 2026 तक। प्रत्येक रेजिमेंट में 8 लॉन्चर (32 मिसाइलें), 40-400 किमी रेंज, न्यूक्लियर मिसाइलों को हवा में नष्ट करने की क्षमता। भारत 300 अतिरिक्त मिसाइलें ($1.2 बिलियन) खरीदने की तैयारी में है।

S-500 प्रोमिथियस (S-400 का उन्नत संस्करण) पर भी फोकस होगा। इसकी 600 किमी रेंज, 200 किमी ऊंचाई, हाइपरसोनिक/बैलिस्टिक मिसाइलों और लो-ऑर्बिट सैटेलाइट्स को नष्ट करने की क्षमता है। 77N6-N1 मिसाइलें J-20 जैसे जेट्स को गिरा सकती हैं। महंगा होने के बावजूद, भारत इसे CAATSA प्रतिबंधों के बावजूद खरीदने पर विचार कर रहा है।

Su-57 चेकमेट पर भी समझौता संभव। रूस पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में उत्पादन का प्रस्ताव दे रहा है ($8-12 बिलियन)। Su-57 F-35 से बेहतर डॉगफाइट, कम रखरखाव और हिमालयी/रेगिस्तानी संचालन में सक्षम है। AESA रडार, क्रूज मिसाइल क्षमता, AL-51F1 इंजन (सुपरसोनिक क्रूज) से लैस। MiG-21 रिटायरमेंट के बाद IAF के लिए महत्वपूर्ण, AMCA प्रोजेक्ट तक ब्रिज।

ये समझौते पश्चिमी दबाव (CAATSA) के बावजूद भारत की स्वायत्तता दिखाते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रूसी समकक्ष आंद्रेई बेलौसोव से बैठक में Su-30 अपग्रेड, स्पेयर पार्ट्स और RELOS (लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट) पर भी बात हुई। यात्रा से व्यापार $68.7 बिलियन (मार्च 2025) से $100 बिलियन (2030) तक पहुंचेगा।

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