देश

ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल: भारत की रक्षा में नया अध्याय, दुश्मन की मिसाइल डिफेंस को चकमा देने वाली तकनीक

आधुनिक युद्धों में अब सेना की संख्या से ज्यादा हवाई श्रेष्ठता और उन्नत हथियारों का महत्व बढ़ गया है। पहले जहां जमीनी फौजें युद्ध का फैसला करती थीं, वहीं अब वायुसेना और मिसाइल तकनीक गेम चेंजर बन चुकी हैं। दुनिया भर में चल रहे संघर्षों—like रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-गाजा संघर्ष और अन्य क्षेत्रीय तनाव—में हवाई हमले, ड्रोन अटैक और सटीक मिसाइल स्ट्राइक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ताकतवर देश अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहे हैं, और इसी क्रम में हाइपरसोनिक हथियारों की होड़ तेज हो गई है।

21वीं सदी के युद्ध अब पूरी तरह बदल चुके हैं। अब देशों की ताकत उनकी वायुसेना की मजबूती और उन्नत रक्षा प्रणालियों से मापी जाती है। हर राष्ट्र अपनी डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए नई तकनीकों पर निवेश कर रहा है। भारत भी इस रेस में किसी से पीछे नहीं है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) हाइपरसोनिक तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है, जो भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा।

DRDO का ‘ध्वनि’ हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं, और 2026 की पहली तिमाही में इसका पहला उड़ान परीक्षण होने की संभावना है। ‘ध्वनि’ मैक 6 या उससे अधिक गति (लगभग 7400 किमी प्रति घंटा) प्राप्त करने में सक्षम होगा, जिससे मौजूदा रडार सिस्टम इसे ट्रैक करना मुश्किल पाएंगे। इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि यह उड़ान के दौरान तीव्र मोड़ ले सकता है और दिशा बदल सकता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे रोकने में असफल हो जाएंगी।

इसके अलावा, ‘ध्वनि’ में एडवांस्ड थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है, जो हाइपरसोनिक गति पर उत्पन्न होने वाली बेहद उच्च तापमान से इसे सुरक्षित रखेगा। यह बूस्ट-ग्लाइड तकनीक पर आधारित है, जहां रॉकेट बूस्टर इसे ऊंचाई तक पहुंचाता है, फिर ग्लाइड व्हीकल अलग होकर वायुमंडल में फिसलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ता है। यह तकनीक HSTDV (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल) के सफल परीक्षणों पर आधारित है।

‘ध्वनि’ का सफल विकास भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा, जो हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल तकनीक में महारत रखते हैं। यह न केवल तकनीकी उपलब्धि होगी, बल्कि भारत की सामरिक शक्ति को मजबूत बनाएगी और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी जवाब देगी।

Related Articles

Back to top button