SIR ब्रेकिंग न्यूज: चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समयसीमा 7 दिन बढ़ाई, अब 11 दिसंबर तक भर सकेंगे फॉर्म; जानें नया शेड्यूल
चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समयसीमा को एक सप्ताह बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पहले निर्धारित अंतिम तिथि 4 दिसंबर 2025 को आगे बढ़ाकर अब 11 दिसंबर तक कर दिया गया है।
यह निर्णय 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए लिया गया, ताकि राज्यों को फॉर्म वितरण, संग्रह और डिजिटाइजेशन को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सहायता मिले। इससे मतदाताओं को अपने नाम मतदाता सूची में जोड़ने या सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
ECI ने रविवार (30 नवंबर 2025) को आधिकारिक बयान जारी कर नया शेड्यूल घोषित किया। इसमें एंयूमरेशन पीरियड (फॉर्म भरने की अवधि) को 11 दिसंबर तक विस्तारित किया गया है। ड्राफ्ट मतदाता सूची अब 16 दिसंबर को प्रकाशित होगी, जबकि अंतिम सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। यह विस्तार बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर अतिरिक्त बोझ और विपक्षी दलों की शिकायतों के बाद आया है, जो प्रक्रिया को जल्दबाजी का मानते थे।
SIR का नया समयसीमा शेड्यूल
चुनाव आयोग ने SIR के दूसरे चरण के लिए निम्नलिखित संशोधित तिथियां तय की हैं, जो आंदमान और निकोबार द्वीपसमूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर लागू होंगी:
- एंयूमरेशन पीरियड (फॉर्म संग्रह और डिजिटाइजेशन): 11 दिसंबर 2025 तक (पहले 4 दिसंबर)।
- पोलिंग स्टेशन का तर्कसंगतकरण और पुनर्व्यवस्था: 11 दिसंबर 2025 तक।
- ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन: 16 दिसंबर 2025 (पहले 9 दिसंबर)।
- दावा और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि: 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक।
- नोटिस चरण (सुनवाई, सत्यापन और निर्णय): 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक।
- मतदाता सूची स्वास्थ्य जांच और अंतिम प्रकाशन की अनुमति: 10 फरवरी 2026।
- अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 14 फरवरी 2026 (पहले 7 फरवरी)।
यह विस्तार मतदाताओं के लिए राहत लेकर आया है, खासकर उन राज्यों में जहां BLOs पर अतिरिक्त दबाव था। ECI ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए है। विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने पहले SIR को ‘जल्दबाजी’ बताकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब इसे सकारात्मक कदम माना जा रहा है।