सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सभी अपराधों में गिरफ्तारी के आधार लिखित में देना अनिवार्य, मुंबई हिट-एंड-रन केस से निकला बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अब हर गिरफ्तारी में पुलिस या जांच एजेंसी को आरोपी को उसकी समझ वाली भाषा में गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना होगा, चाहे मामला आईपीसी, बीएनएस, पीएमएलए या किसी भी कानून का हो।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने 6 नवंबर 2025 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत यह मौलिक अधिकार है और इसका पालन न होने पर गिरफ्तारी व रिमांड दोनों अवैध हो जाएंगे।
यह फैसला मुंबई के चर्चित वर्ली हिट-एंड-रन केस से जुड़े मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य (क्रिमिनल अपील नंबर 2195/2025) में आया। जुलाई 2024 में मिहिर शाह ने बीएमडब्ल्यू कार से स्कूटर को टक्कर मारकर एक महिला की मौत कर दी थी। गिरफ्तारी के समय पुलिस ने लिखित आधार नहीं दिए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता देखते हुए गिरफ्तारी वैध मानी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराध में भी लिखित आधार देना जरूरी है, कोई अपवाद नहीं।
कोर्ट ने दो स्तर की प्रक्रिया तय की:
सामान्य मामले (जैसे आर्थिक अपराध, पीएमएलए): गिरफ्तारी के समय ही लिखित आधार देना अनिवार्य।
आपात मामले (शारीरिक अपराध, मौके पर पकड़े जाने पर): मौखिक बताना काफी लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से कम से कम दो घंटे पहले लिखित कॉपी देनी होगी, ताकि आरोपी वकील से सलाह ले सके।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर यह नियम नहीं माने गए तो गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी और आरोपी को तुरंत रिहा करने का अधिकार होगा। यह फैसला पंकज बंसल केस (2023) को आगे बढ़ाता है जहां स्पेशल कानूनों में लिखित आधार अनिवार्य किया गया था। अब यह सभी अपराधों पर लागू होगा।