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नेपाल में नेपो किड्स का शाही जीवन जेन-जी के गुस्से का सबब, डिजाइनर बैग्स से लग्जरी कारों तक की फिजूलखर्ची पर भड़का आंदोलन

नेपाल में जेन-जी के नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों का एक प्रमुख कारण राजनीतिक नेताओं के बच्चों यानी ‘नेपो किड्स’ का आलीशान जीवनशैली है। सोशल मीडिया पर #NepoKids और #NepoBaby जैसे ट्रेंड्स वायरल हो गए, जहां युवाओं ने नेताओं के बच्चों द्वारा दिखाए जा रहे डिजाइनर हैंडबैग, महंगे कपड़े, लग्जरी कारें, विदेशी छुट्टियां और ब्रांडेड सामान की तस्वीरें शेयर कीं।

यह अभियान भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ गुस्से को भड़काने वाला साबित हुआ, क्योंकि नेपाल जैसे गरीब देश में एक चौथाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है, जबकि ये ‘नेपो किड्स’ टैक्सपेयर्स के पैसे से ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं।

यह आंदोलन सोशल मीडिया बैन के ठीक पहले तेज हुआ, जब टिकटॉक, रेडिट और एक्स पर युवाओं ने नेताओं के बच्चों के इंस्टाग्राम और टिकटॉक अकाउंट्स को टारगेट किया। एक वायरल पोस्ट में कहा गया, “नेपो बेबीज टैक्सपेयर्स के चोरी हुए पैसे से लग्जरी जीवन जीते हैं, जबकि आम लोग संघर्ष कर रहे हैं।” पूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों के बच्चों को विदेशी शिक्षा, यूरोप ट्रिप्स और महंगे ब्रांड्स जैसे गUCCI, प्रADA, रोलेक्स के साथ जोड़ा गया। जेन-जी ने इसे सिस्टमिक भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया, जहां राजनीतिक कनेक्शन्स से युवा विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं, जबकि बाकी बेरोजगारी और गरीबी से जूझते हैं।

इस गुस्से ने प्रदर्शनों को हिंसक रूप दिया, जिसमें 30 से अधिक मौतें हुईं और संसद भवन सहित सरकारी इमारतों पर हमले हुए। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। जेन-जी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ सोशल मीडिया बैन नहीं, बल्कि नेपोटिज्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति है।

अंतरिम सरकार की मांग के बीच युवा सोशल मीडिया पर वीपीएन और वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स से मैसेज फैला रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंदोलन श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के युवा विद्रोहों से प्रेरित है, जो असमानता के खिलाफ है।

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