
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कॉलेजियम सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने हाल ही में एक व्याख्यान में कहा कि उच्च न्यायालय के एक जज के तबादले के प्रस्ताव में केंद्र सरकार के अनुरोध पर बदलाव करना “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक” है।
जस्टिस भुइयां ने जोर दिया कि जजों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक मामला है और इसमें कार्यपालिका (सरकार) की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कॉलेजियम सिस्टम की अखंडता को हर कीमत पर बचाना होगा।” अगर कॉलेजियम खुद रिकॉर्ड करता है कि तबादला सरकार के दोबारा विचार के कारण हुआ, तो यह स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रमाण है।
हालांकि उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को स्वीकार किया, लेकिन इसे कार्यपालिका नियंत्रित प्रणाली से बेहतर बताया। यह टिप्पणी न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की बहस को फिर से तेज कर रही है।



