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ट्रंप के ‘पीस बोर्ड’ में शामिल होने से कई बड़े देशों ने किया इनकार, यूरोपीय राष्ट्रों ने ठुकराया प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने के लिए कई देशों ने इनकार कर दिया है। यह बोर्ड मूल रूप से गाजा युद्ध समाप्त करने और पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसका दायरा वैश्विक संघर्षों तक बढ़ा दिया गया है। दावोस में 22 जनवरी 2026 को चार्टर साइनिंग समारोह हुआ, जहां करीब 20-25 देशों ने हिस्सा लिया।

शामिल होने वाले प्रमुख देश

  • सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  • अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, हंगरी, कजाकिस्तान, कोसोवो, मोरक्को, उज्बेकिस्तान, वियतनाम
  • अन्य: इजराइल, कुवैत आदि (कुल 20-35 देशों ने सहमति जताई)

ये ज्यादातर मध्य पूर्व, मुस्लिम बहुल और कुछ गैर-पश्चिमी देश हैं, जो गाजा में स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण का समर्थन कर रहे हैं।

इनकार करने वाले प्रमुख देश

  • फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, स्लोवेनिया
  • ब्रिटेन (UK), जर्मनी, इटली, यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा
  • अन्य: चीन, रूस (कुछ रिपोर्ट्स में अध्ययन कर रहे), यूक्रेन, सिंगापुर, कंबोडिया, पैराग्वे (कुछ ने अभी फैसला नहीं किया)

ये देश मुख्य रूप से यूरोपीय और पश्चिमी सहयोगी हैं, जिन्होंने बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में हस्तक्षेप या रूस जैसे विरोधी देशों की भागीदारी को लेकर चिंता जताई है।

ट्रंप ने इनकार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इसे वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि समय के साथ अन्य देश भी समझेंगे। बोर्ड में स्थायी सदस्यता के लिए $1 बिलियन की फीस का प्रावधान है, लेकिन कई देशों ने इसे संसदीय मंजूरी के बिना नहीं जोड़ा।

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