प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत के दृढ़ आह्वान को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए, न कि उन्हें और बढ़ाकर। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और भू-राजनीतिक घटनाक्रम जटिल होते जा रहे हैं। उच्च स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया के सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण बातचीत के लिए प्रयास करने का आग्रह करता रहेगा।
प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद आईं, जिसमें भारत ने सभी हितधारकों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी दीर्घकालिक नीति की पुष्टि की। बीती रात को प्रधानमंत्री ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की, जो देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। यह बैठक अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।


