
भारत की रक्षा व्यवस्था सतर्क हो गई है क्योंकि इंडोनेशिया पाकिस्तान-चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की खरीद पर विचार कर रहा है, ठीक उसी समय जब नई दिल्ली के साथ 450 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील अंतिम चरण में है।
यह मुद्दा तब गरमा गया जब पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री Sjafrie Sjamsoeddin और पाकिस्तान एयर फोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल Zaheer Ahmed Baber Sidhu के बीच उच्च-स्तरीय बैठक हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने इंडोनेशिया को 40 JF-17 मल्टी-रोल फाइटर जेट्स की पेशकश की, जो चीन के साथ संयुक्त विकास का उत्पाद है। इसके अलावा, पाकिस्तानी बने कॉम्बैट ड्रोन की खरीद पर भी चर्चा हुई।
भारत इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। ऐसे में जकार्ता का पाकिस्तान और चीन से जुड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ गहराता रक्षा जुड़ाव नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है।
ब्रह्मोस डील का महत्व
नवंबर 2025 में तीसरे भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और Sjafrie Sjamsoeddin ने ब्रह्मोस डील पर काफी प्रगति की थी। यह डील इंडोनेशिया को फिलीपींस के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा देश बनाएगी जो इस मिसाइल सिस्टम को हासिल करेगा।
वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं, अब केवल रूस की औपचारिक मंजूरी बाकी है (क्योंकि ब्रह्मोस जॉइंट वेंचर में रूस की 49.5% हिस्सेदारी है)। ब्रह्मोस एयरोस्पेस DRDO और रूस की NPO Mashinostroyenia की संयुक्त कंपनी है, जिसमें भारत का नियंत्रण 50.5% है।
इंडोनेशिया की ब्रह्मोस में रुचि उसके समुद्री रक्षा को मजबूत करने की जरूरत से जुड़ी है। यह मिसाइल अपनी गति (मैक 3+), सटीकता और 290 किमी रेंज के लिए मशहूर है, जो नटुना सागर में आक्रामक गतिविधियों को रोकने में मदद करेगी। फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर में ब्रह्मोस खरीदा था, जिसने स्कारबरो शोल के पास रणनीतिक लाभ दिया।
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की भूमिका
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ब्रह्मोस ने निर्णायक भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI से 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं, जिससे पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेस (चकलाला, रफीकी, सरगोधा आदि) को भारी नुकसान पहुंचा। ये मिसाइलें पाकिस्तान की चीनी मूल की एयर डिफेंस को चकमा देकर रडार, कमांड सेंटर और रनवे तबाह कर गईं। पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ ने माना कि हमले ने उनकी सेना को चौंका दिया।
रणनीतिक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया का JF-17 पर विचार ब्रह्मोस डील के विश्वास को कमजोर कर सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को जटिल बना सकता है। यह गलत संकेत देगा, जब साझा रणनीतिक हितों पर आधारित साझेदारियां सबसे महत्वपूर्ण हैं।



