
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले बागी विधायकों की वापसी का रास्ता साफ कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों ने 2024 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया था, वे इस बार (2025 में होने वाले) राज्यसभा चुनाव में सपा प्रत्याशियों को वोट देकर पार्टी में वापस लौट सकते हैं।
पिछला क्रॉस वोटिंग का इतिहास
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी जीते थे। सपा के 7 विधायकों—मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य—ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे भाजपा के संजय सेठ आठवें प्रत्याशी के रूप में जीते और सपा के तीसरे प्रत्याशी आलोक रंजन हार गए। बाद में सपा ने चार बागियों—मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और पूजा पाल—को निष्कासित कर दिया।
बागियों में असंतोष
अब कई बागी विधायकों को लग रहा है कि भाजपा में उन्हें अपेक्षित सम्मान और महत्व नहीं मिला। कुछ विधायक सपा नेतृत्व से संपर्क में हैं। अखिलेश यादव ने स्थिति स्पष्ट कर दी है कि पार्टी उनका रुख नकारात्मक नहीं रख रही, लेकिन वापसी के लिए ‘लॉयल्टी’ साबित करनी होगी।
शर्त और फॉर्मूला
सपा सूत्रों के अनुसार, इच्छुक बागी विधायकों को कोई माफीनामा नहीं लिखाना पड़ेगा। बस आगामी राज्यसभा चुनाव (25 नवंबर 2025 से पहले) में सपा प्रत्याशियों के पक्ष में वोट देकर अपना समर्पण दिखाना होगा। इसके बाद उन्हें पार्टी में वापस ले लिया जाएगा।
यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा की ताकत बढ़ा सकता है, जबकि भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।



