
महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने एक अभिनव और भावपूर्ण आध्यात्मिक पहल की शुरुआत की है। इस परंपरा के तहत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख तीर्थों और शक्तिपीठों से पावन भेंट, श्रद्धा-उपहार और प्रसाद अर्पित किए जाएंगे, ताकि सनातन आस्था को एक सूत्र में बांधते हुए वैश्विक आध्यात्मिक एकता को मजबूत किया जा सके।
14 फरवरी 2026 को इसकी शुरुआत हुई, जब काशी के शक्तिपीठ माता विशालाक्षी मंदिर, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर और तमिलनाडु के तेन सबानायकर मंदिर (कोविलूर) से भगवान विश्वनाथ के लिए विशेष भेंट और उपहार प्रेषित किए गए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इन सभी अर्पणों को विधिवत और पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार किया।
इसके बाद भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव की ओर से इन तीनों मंदिरों के प्रतिनिधियों को श्री विश्वेश्वर धाम से प्रति-उपहार (रिटर्न गिफ्ट) अर्पित किए गए। यह आदान-प्रदान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सनातन धर्म की शाश्वत परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसमें पारस्परिक श्रद्धा, आध्यात्मिक सौहार्द और देवालयों के बीच आत्मीय बंधन निहित है।
यह पहल सनातन संस्कृति में पारिवारिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकात्मता का संदेश देती है। महाशिवरात्रि पर शुरू हुई यह परंपरा भविष्य में राष्ट्र और विश्व के विभिन्न तीर्थों को एक आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।



