
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल और आपूर्ति में व्यवधान के बीच भारत ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को आदेश दिया है कि वे अपने निर्यात, आयात और इन्वेंटरी (स्टॉक) का पूरा विवरण सरकारी एजेंसी को साझा करें।
बुधवार रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) को यह डेटा इकट्ठा करने और विश्लेषण करने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनियों को किसी भी “अनुबंध, समझौते, वाणिज्यिक व्यवस्था या गोपनीयता दायित्व” के बावजूद जानकारी देनी होगी। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी कंपनी “वाणिज्यिक संवेदनशील या मालिकाना” होने का हवाला देकर डेटा देने से इनकार नहीं कर सकती।
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। भारत ने अभी तक रिफाइंड फ्यूल के निर्यात पर कोई रोक नहीं लगाई है, जबकि चीन ने ऐसा कदम उठाया है। यदि भारत भी निर्यात पर अंकुश लगाता है तो दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि अन्य रिफाइनर पहले ही निर्यात लगभग बंद कर चुके हैं।
सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं को ईंधन की कमी और कीमतों में और उछाल से बचाने की कोशिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत ईंधन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगा सकता है।



