
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया के महासागर अब केवल वाणिज्य के चैनल नहीं रह गए हैं, बल्कि रणनीतिक शक्ति के प्रमुख केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। समुद्री सम्मेलन “सागर संकल्प” को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आ रहा है, जहां लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं और भू-राजनीतिक संरचनाओं को चुनौती दी जा रही है। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “पहले समुद्र को केवल व्यापार का माध्यम माना जाता था, लेकिन आज हम उन्हें रणनीतिक प्रभुत्व का केंद्र बनते देख सकते हैं।
रक्षा मंत्री ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को वैश्विक परिस्थितियों में हो रहे बदलावों का स्पष्ट उदाहरण बताया। राजनाथ सिंह ने कहा, “मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति इसका ज्वलंत उदाहरण है। वहां जो कुछ हो रहा है वह बहुत ही असामान्य है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वहां या हमारे पड़ोस में स्थिति में क्या बदलाव आएगा।” उनकी यह टिप्पणी अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच आई है।
आगे बोलते हुए राजनाथ सिंह ने ऊर्जा के लिहाज से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य और पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के आर्थिक परिणामों के बारे में भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिंह ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य या पूरा फारस की खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जब इस क्षेत्र में कोई व्यवधान या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।” उनके अनुसार, इस तरह के व्यवधानों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है।



