
गुजरात की राजनीति में अब नया मोड़ आ गया है। तीन दशकों से भाजपा का एकछत्र राज रहा राज्य अब आम आदमी पार्टी (AAP) को मजबूत विकल्प के रूप में देख रहा है। WeePreside और CIF द्वारा किए गए “Pulse of Gujarat 2026” सर्वे से पता चलता है कि यहां अब मुख्य मुकाबला भाजपा और AAP के बीच होता दिख रहा है, जबकि कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ रही है।
सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, AAP का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है। इससे साफ है कि AAP अब कांग्रेस को पछाड़कर गुजरात की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुकी है। भाजपा अभी भी 49.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आगे है, लेकिन अब उसकी मुख्य चुनौती कांग्रेस से नहीं, बल्कि AAP से आ रही है।
क्षेत्रीय स्तर पर भी यही ट्रेंड दिख रहा है। सौराष्ट्र-कच्छ जैसे इलाकों में, जहां भाजपा को कुछ नुकसान की आशंका है, वहां AAP तेजी से अपनी पैठ बना रही है। उत्तर और मध्य गुजरात में भाजपा मजबूत है, लेकिन शहरी और मेट्रो क्षेत्रों में AAP को कांग्रेस से कहीं ज्यादा समर्थन मिल रहा है। शहरों में AAP अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि सीधी चुनौती देने वाली पार्टी बन गई है।
इसी बदलते माहौल के बीच अहमदाबाद में AAP कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता के मन से अब डर निकल चुका है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 2027 में गुजरात में सत्ता परिवर्तन होगा और AAP सत्ता में आएगी। केजरीवाल ने यह भी जोड़ा कि अगर और लोगों को जेल में डाला गया तो डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह लड़ाई अन्याय के खिलाफ है और जनता इसका जवाब देगी।



