
दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर भारी मात्रा में जले और अधजले नोट मिलने के विवाद में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को त्यागपत्र सौंपा है।
इस मामले में उनकी आंतरिक जांच चल रही थी और महाभियोग की भी तैयारी हो रही थी। जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्यों से पहले ही अलग कर दिया गया था। मार्च 2025 में दिल्ली के उनके घर में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को जले हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं। इसके बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।
5 अप्रैल 2025 को उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी, लेकिन जांच के चलते उन्हें कोई केस नहीं सौंपा गया। कई सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग नोटिस भी दिया था।
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में जस्टिस वर्मा ने कहा, “अत्यंत पीड़ा के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।”




