
पिछले 24 घंटों में ईरान ने अमेरिकी सैन्य विमानों पर जोरदार हमले किए हैं। एक F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को गिरा दिया गया, जबकि सर्च ऑपरेशन में शामिल दो ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर भी ईरानी गोलीबारी का शिकार हुए। इसके अलावा एक A-10 वारथॉग विमान भी कुवैत के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
ये घटनाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “ईरान के आसमान पर पूरी तरह कब्जा” वाले दावों को सीधा झटका दे रही हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका तेहरान के ऊपर बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भर रहा है और ईरान कुछ नहीं कर सकता। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है।
ईरान ऐसा कैसे कर पा रहा है?
ईरान के पास पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हो चुके हैं, लेकिन वह असममित युद्ध (asymmetric warfare) में माहिर है। ईरान अब मोबाइल लॉन्चर, अंडरग्राउंड “मिसाइल सिटी” और छिपे हुए ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा है।
मुख्य हथियार माना जा रहा है माजिद (Majid/AD-08) एयर डिफेंस सिस्टम। यह 2021 में सेवा में आया शॉर्ट-रेंज सिस्टम है जो:
- रडार पर निर्भर नहीं होता, बल्कि पैसिव इंफ्रारेड (heat-seeking) तकनीक इस्तेमाल करता है
- कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाता है (8 किमी रेंज, 6 किमी ऊंचाई तक)
- रडार सिग्नल नहीं छोड़ता, इसलिए दुश्मन विमान को पहले पता नहीं चलता
- F-35 जैसे स्टेल्थ विमानों के इंजन से निकलने वाली गर्मी को आसानी से ट्रैक कर सकता है
इस सिस्टम को पहले मार्च में F-35 को नुकसान पहुंचाने का श्रेय दिया गया था। अब F-15E के मामले में भी यही सिस्टम काम कर रहा माना जा रहा है।
ईरान ने अपनी रणनीति बदल ली है। पहले के फिक्स्ड इंस्टॉलेशन की जगह अब मोबाइल लॉन्चर और “शूट एंड स्कूट” (फायर करके तुरंत जगह बदलना) की तकनीक अपनाई गई है। इससे अमेरिकी और इजरायली हमलों के बावजूद कई लॉन्चर सुरक्षित बचे हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ये घटनाएं अमेरिका के लिए बड़ा झटका हैं। 20 साल बाद पहली बार सक्रिय युद्ध में अमेरिकी फाइटर जेट दुश्मन के हमले से गिराया गया है। हालांकि ईरान अभी भी अमेरिका के बराबर नहीं है, लेकिन उसने साबित कर दिया है कि ईरान के आसमान को “पूरी तरह नियंत्रित” करना इतना आसान नहीं है।



