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बांग्लादेश को लेकर भारत का एक बड़ा राजनयिक कदम

बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, भारत ने वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया। यह कदम बांग्लादेश में संसदीय चुनावों से कुछ ही सप्ताह पहले उठाया गया है। भारत ने बांग्लादेश में दूतावास और डाकघर के अधिकारियों के आश्रितों को एहतियाती उपाय के तौर पर घर लौटने की सलाह दी है। परिवारों को वापस बुला लिया गया है, लेकिन बांग्लादेश में भारतीय दूतावास और सभी डाकघर खुले और पूरी तरह से कार्यरत हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश में अपने राजनयिकों और अधिकारियों के लिए नियुक्तियों को “गैर-पारिवारिक” श्रेणी में डाल दिया है। इसका कारण चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियां और उनसे जुड़ी सुरक्षा चिंताएं हैं। इसे सबसे सख्त सुरक्षा उपायों में से एक माना जा रहा है। जहां एक तरफ भारत और पाकिस्तान के संबंध सबसे निचले स्तर पर हैं, वहीं बांग्लादेश में भारतीय राजनयिकों के लिए नियमों को और भी कड़ा कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय दूतावासों को सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर दिसंबर 2025 में इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद से।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में स्थित मिशन (उच्चायोग) कार्यरत हैं और सभी पदों पर कर्मचारी मौजूद हैं। ढाका स्थित उच्चायोग के अलावा, भारतीय राजनयिक चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी तैनात हैं। राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार भारत कब लौटेंगे, यह अभी तक ज्ञात नहीं है।

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