
रेटिंग एजेंसी ICRA ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी बनी रही तो भारत का वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार के 4.5% फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य पर दबाव पड़ सकता है। ऊंची कीमतों से खाद, LPG और उर्वरक पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा, जिससे सरकारी खर्च बढ़ेगा और राजस्व संग्रह पर भी असर पड़ेगा।
ICRA ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्स कलेक्शन में कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें आर्थिक स्थिरीकरण कोष (ESF) का उपयोग, खर्च में बचत और अतिरिक्त बजट प्रावधान शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार सही रणनीति अपनाए तो वित्तीय घाटे को लक्ष्य के करीब रखा जा सकता है, लेकिन यह पूरी तरह तेल-गैस की कीमतों के स्तर और अवधि पर निर्भर करेगा।



