
जीएसटी दरों में कटौती से कुछ समय पहले साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और तेल जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हुई थीं, लेकिन अब आम आदमी को फिर महंगाई का झटका लग रहा है। एफएमसीजी कंपनियां इनपुट लागत बढ़ने के कारण इन उत्पादों की कीमतें 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ा रही हैं।
बड़ी कंपनियों का अपडेट
- डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी ने औसतन 2% तक कीमतें बढ़ाई हैं।
- हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) साबुन और शैंपू जैसी वस्तुओं में बढ़ोतरी की योजना बना रही है।
- टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने चाय में मामूली वृद्धि की है।
कीमत बढ़ने के मुख्य कारण
- रुपये की लगातार गिरावट: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयातित कच्चे माल (ओट्स, बादाम, सल्फर, एन-पैराफिन आदि) महंगा हो गया।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और नारियल तेल का दोगुना होना।
- वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की लागत बढ़ना।
एफएमसीजी कंपनियां पहले जीएसटी कटौती के बाद कीमतें स्थिर रखने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन अब बढ़ती लागत को आंशिक रूप से उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। इससे कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है, लेकिन ग्राहकों पर सीधा बोझ पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
यदि रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की महंगाई जारी रही, तो आने वाले महीनों में साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और अन्य FMCG उत्पादों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।




