
ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में चीनी रोबोडॉग को अपना इनोवेशन बताने के विवाद के बाद फिर सुर्खियों में है। अब पेटेंट फाइलिंग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ने हजारों पेटेंट आवेदन दाखिल किए (कुछ रिपोर्ट्स में 2,297 तक), लेकिन मंजूर सिर्फ 24 (लगभग 1%)। वहीं IITs का ग्रांट रेट 63% है, कम फाइलिंग के बावजूद। विशेषज्ञों का कहना है कि NIRF रैंकिंग में पब्लिश्ड पेटेंट्स को अंक मिलते हैं, जिससे ‘नंबर गेम’ चल रहा है—कम क्वालिटी वाले आवेदन दाखिल कर रैंकिंग सुधारने की कोशिश।
सरकारी सब्सिडी और इंसेंटिव (प्रति पेटेंट लाखों रुपये तक) का इस्तेमाल होने का आरोप। सवाल है कि क्या इनोवेशन के नाम पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ? विशेषज्ञ स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
AI समिट विवाद ने यूनिवर्सिटी की इनोवेशन क्लेम्स पर और सवाल खड़े किए हैं। जांच से सच्चाई सामने आएगी।



