महराजगंज में इंसानियत की मिसाल: पिता की लाश ठेले पर ले जा रहे थे बच्चे, मुस्लिम भाइयों ने कराया अंतिम संस्कार
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे के राजेंद्रनगर वार्ड में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई, जहां आर्थिक तंगी के कारण 50 वर्षीय लव कुमार पटवा की मृत्यु के बाद उनके दो नाबालिग बेटों, राजवीर (14) और देवराज (10), को पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए कोई सहायता नहीं मिली।

तीन दिन तक शव घर में सड़ता रहा, और जब कोई मदद नहीं मिली तो बच्चों ने शव को ठेले पर रखकर डंडा नदी में प्रवाहित करने का फैसला किया। इस दौरान दो मुस्लिम भाइयों, राशिद कुरैशी और वारिस कुरैशी, ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए शव का विधिवत अंतिम संस्कार कराया।
लव कुमार पटवा फेरी लगाकर चूड़ियां और अन्य सामान बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी की एक साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। उनके तीन बच्चे हैं—एक बेटी जो अपनी दादी के साथ पड़ोस के वार्ड में रहती है, और दो बेटे, राजवीर और देवराज, जो उनके साथ रहते थे। कुछ दिनों से लव कुमार की तबीयत खराब थी, और शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 को दोपहर में उनकी मृत्यु हो गई।
बच्चों ने पड़ोसियों और अपनी दादी को सूचना दी, लेकिन दादी ने दुख जताकर वापस चले जाने के अलावा कोई मदद नहीं की। पड़ोसियों ने भी केवल सांत्वना दी और अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गए। आर्थिक तंगी से जूझ रहे बच्चे समझ नहीं पा रहे थे कि अंतिम संस्कार के लिए क्या करें। तीन दिन तक शव घर में पड़ा रहा, जिससे दुर्गंध के कारण घर में रहना मुश्किल हो गया।
बच्चों का हौसला और निराशा
तीन दिन तक कोई सहायता न मिलने पर राजवीर और देवराज ने रविवार, 24 अगस्त 2025 को पिता के शव को कपड़े में लपेटकर ठेले पर रखा और उसे डंडा नदी में प्रवाहित करने के लिए निकल पड़े। रास्ते में कई लोगों ने उन्हें देखा, लेकिन किसी ने मदद की पेशकश नहीं की। बच्चे अपनी मासूमियत और मजबूरी में इस कठिन निर्णय को लागू करने जा रहे थे।
मुस्लिम भाइयों की इंसानियत
रास्ते में छपवा तिराहे पर वार्ड नंबर दो, बिस्मिलनगर के सभासद प्रत्याशी राशिद कुरैशी ने बच्चों को ठेले पर शव ले जाते देखा। उनकी स्थिति और कहानी सुनकर द्रवित हुए राशिद ने तुरंत अपने बड़े भाई, वार्ड नंबर 17, राहुल नगर के सभासद वारिस कुरैशी को सूचना दी। दोनों भाइयों ने मिलकर चार पहिया वाहन का इंतजाम किया और शव को श्मशानघाट पहुंचाया। वहां उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार लव कुमार का अंतिम संस्कार कराया, जिससे बच्चों को पिता की अंतिम विदाई में सम्मानजनक समाधान मिला।
सामाजिक संदेश और माहौल
इस घटना ने नौतनवा और आसपास के क्षेत्र में सामुदायिक एकता और मानवता की भावना को उजागर किया। राशिद और वारिस कुरैशी की इस पहल को स्थानीय लोगों ने सराहा, और यह घटना सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गई। बच्चों की मजबूरी और समाज की उदासीनता ने जहां इंसानियत को शर्मसार किया, वहीं इन दो भाइयों ने अपनी मदद से मानवता का परिचय दिया।
पुलिस या प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन को उनके लिए सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए।