
पश्चिम बंगाल सरकार ने पुरोहितों और मुअज्जिनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की है, जिससे कुल मानदेय 2000 रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे पुरोहितों और मुअज्जिनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की गई है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है। इस संशोधन के साथ, उन्हें अब प्रति माह 2000 रुपये प्राप्त होंगे।
साथ ही, पुरोहितों और मुअज्जिनों द्वारा विधिवत प्रस्तुत किए गए सभी नए आवेदनों को राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा हमें ऐसे वातावरण को बढ़ावा देने पर गर्व है जहाँ प्रत्येक समुदाय और प्रत्येक परंपरा का सम्मान और सुदृढ़ीकरण होता है। हमारा प्रयास यही है कि हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संरक्षकों को वह मान्यता और समर्थन मिले जिसके वे हकदार हैं,।इमामों (मुस्लिम धर्मगुरुओं) को 2,500 रुपये का मासिक भत्ता मिलता है, जबकि मुअज्जिनों को 2012 से 1,000 रुपये का मानदेय मिलता आ रहा है। 2012 में, सत्ता में आने के एक साल बाद, टीएमसी सरकार ने राज्य में इमामों और मुअज्जिनों के लिए मासिक मानदेय की घोषणा की।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इमामों और मुअज्जिनों के लिए घोषित भत्ते को अदालत द्वारा असंवैधानिक और जनहित के विरुद्ध बताते हुए खारिज कर दिए जाने के बाद, राज्य सरकार ने इसे पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के माध्यम से वितरित किया। 2020 में, 2021 के विधानसभा चुनावों से कुछ ही महीने पहले, जब भाजपा अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों के साथ सत्ता के लिए दबाव बना रही थी, तब टीएमसी सरकार ने राज्य के 8,000 से अधिक पुजारियों के लिए 1,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता और मुफ्त आवास की घोषणा की थी। बनर्जी की सोमवार की घोषणा पर भाजपा और सीपीआई (एम) ने भी जमकर आलोचना की और उन पर वोट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता की राजनीति करने का आरोप लगाया।



