आजम खान की रिहाई पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान: ‘कोर्ट का शुक्रिया, सपा सरकार बनी तो हटेंगे सभी फर्जी केस’, CM पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता आजम खान की सीतापुर जेल से 23 महीने बाद रिहाई पर खुशी जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का आभार व्यक्त किया है। 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा होने के बाद आजम खान का भव्य स्वागत हुआ, जिसमें सैकड़ों समर्थकों ने दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ उनका साथ दिया।
इस बीच, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला और वादा किया कि सपा की सरकार बनने पर आजम खान के खिलाफ दर्ज सभी “फर्जी” मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
अखिलेश यादव का बयान
सीतापुर में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “आज समाजवादियों के लिए खुशी का दिन है। आजम खान साहब की रिहाई ने हमें नई ऊर्जा दी है। हम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं कि हमें न्याय मिला। जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और अपने डिप्टी सीएम के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए हैं, उसी तरह सपा की सरकार बनने पर आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज सभी झूठे और फर्जी केस वापस लिए जाएंगे।”
अखिलेश ने बीजेपी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए कहा, “आजम खान और उनके परिवार को साजिश के तहत फंसाया गया। बीजेपी ने सत्ता का दुरुपयोग करके समाजवादी नेताओं को निशाना बनाया, लेकिन अब जनता इसका जवाब देगी।” उन्होंने रामपुर के विकास में आजम खान के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी रिहाई से सपा को और मजबूती मिलेगी।
रिहाई और स्वागत का माहौल
23 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 12:30 बजे आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए। उनकी रिहाई में 8,000 रुपये के बकाया जुर्माने (3,000 और 5,000 रुपये) के कारण कुछ घंटों की देरी हुई थी, लेकिन औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वह जेल से बाहर आए। रिहाई के बाद आजम खान दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ रामपुर के लिए रवाना हुए। उनके बेटे अदीब आजम, सपा नेताओं अनूप गुप्ता, छत्रपति यादव, और अनिल कुमार वर्मा सहित सैकड़ों समर्थक जेल के बाहर मौजूद थे। कुछ युवा समर्थक गाड़ियों के सनरूफ से बाहर निकलकर काफिले में शामिल हुए, जिससे उत्सव का माहौल बन गया।
सीतापुर जेल के बाहर भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की थी। ड्रोन और स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) के जरिए निगरानी की गई, और कई वाहनों का चालान भी काटा गया। रामपुर में भी आजम खान के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं, और उनके आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
कानूनी पृष्ठभूमि
आजम खान के खिलाफ 111 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जमीन कब्जा, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, और सड़क अवरोध जैसे आरोप शामिल हैं। 18 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्वालिटी बार जमीन कब्जा मामले में उन्हें जमानत दी थी, जिसके बाद उनके सभी 72 प्रमुख मामलों में जमानत हो चुकी है। उनकी रिहाई को सपा समर्थक बीजेपी के “राजनीतिक प्रतिशोध” के खिलाफ जीत के रूप में देख रहे हैं।
सियासी अटकलें: सपा या बसपा?
आजम खान की रिहाई के साथ ही सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि वह सपा छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हो सकते हैं। कुछ समर्थकों ने X पर अखिलेश यादव पर उनकी रिहाई के लिए पर्याप्त समर्थन न देने का आरोप लगाया। सूत्रों के मुताबिक, बसपा सुप्रीमो मायावती 9 अक्टूबर को लखनऊ में एक बड़ी सभा आयोजित करने वाली हैं, जिसमें आजम खान के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अखिलेश के ताजा बयान और उनके समर्थन ने इन अटकलों को कमजोर किया है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश के बयान को “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया और कहा, “आजम खान पर गंभीर आपराधिक मामले हैं, जिनमें कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया था। बीजेपी सरकार ने कानून के तहत कार्रवाई की। अखिलेश यादव का यह बयान अपराधियों को बढ़ावा देने की कोशिश है।” उन्होंने यह भी कहा कि योगी सरकार ने भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, और कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
आजम खान की रिहाई और अखिलेश यादव का बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला सकता है। अखिलेश ने कोर्ट का आभार जताकर और सीएम योगी पर हमला बोलकर सपा के समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश की है।
रामपुर में आजम खान के स्वागत और उनकी भविष्य की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आजम सपा के साथ रहेंगे या बसपा में नई पारी शुरू करेंगे, और क्या सपा 2027 के विधानसभा चुनावों में इस मुद्दे को भुनाने में कामयाब होगी।