
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला रिजर्वेशन बिल पर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर एक-तिहाई आरक्षण तय करना गलत है। उन्होंने पूछा कि आबादी में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है, तो आज की वास्तविक जनसंख्या के अनुसार ही सीटें तय क्यों नहीं की जा रही हैं।
अखिलेश यादव ने कहा, “2011 में आबादी उतनी नहीं थी, जितनी अब है। रिजर्वेशन में आज की जमीनी हकीकत दिखनी चाहिए, न कि 15 साल पुराने आंकड़े।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए पुराने डेटा का इस्तेमाल कर पहले से ही सीटें तय कर चुकी है और इतनी जल्दबाजी का कोई तर्क नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि 2026 में होने वाली नई जनगणना के बाद ही आरक्षण लागू किया जाए, ताकि महिलाओं की वर्तमान संख्या और सामाजिक-आर्थिक यथार्थ को ध्यान में रखा जा सके। अखिलेश के अनुसार, बिना ताजा आंकड़ों के यह योजना अधूरी और पक्षपाती साबित होगी।
सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिला आरक्षण को डीलिमिटेशन से अलग कर 2029 से लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विशेष संसदीय सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है और संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है।



