उत्तर प्रदेश

महाशिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की अनूठी पहल: 62 तीर्थों से पावन भेंट, वैश्विक आध्यात्मिक एकता का संदेश

वाराणसी: महाशिवरात्रि 2026 के परम पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने एक अद्वितीय आध्यात्मिक परंपरा की शुरुआत की है। इस पहल के तहत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों, सिद्धपीठों और प्राचीन तीर्थस्थलों से पवित्र जल, पूजित पुष्पमालाएं, चंदन, रज, वस्त्र और अन्य श्रद्धा-उपहार अर्पित किए जा रहे हैं।

14 फरवरी 2026 तक कुल 62 मंदिरों से पावन भेंट प्राप्त हो चुकी है। इनमें शामिल हैं:

  • तमिलनाडु से: तेन सबनायकर मंदिर (कोविलूर), श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर (चेन्नई), अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर, वामनपुरेश्वरर, द्रौपथी अम्मन मंदिर, कुमारा गुरु परमस्वामी आदि।
  • मथुरा से: श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान।
  • जम्मू-कश्मीर से: श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड।
  • मलेशिया से: श्री महा मरिअम्मन मंदिर, राजाकलियम्मन ग्लास मंदिर, कंदस्वामी कोविल, बालथंडायुथपानी मंदिर आदि।
  • वाराणसी से: सप्तमात्रिका सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतलाधाम, काशी त्रिलोचन महादेव, बड़ी काली जी, केदारेश्वर, काल भैरव, अनपूर्णा, विशालाक्षी मंदिर आदि।
  • उत्तराखंड से: श्री केदारनाथ।
  • मुंबई से: लालबागचा राजा, सिद्धिविनायक मंदिर।
  • गुजरात से: द्वारकाधीश मंदिर।
  • श्रीलंका से: श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर (कोलंबो)।
  • राजस्थान से: नाथद्वारा मंदिर (उदयपुर)।

ये भेंटें कूरियर से भेजी जा रही हैं और कई मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं उपस्थित होकर अर्पण कर रहे हैं। श्री काशी विश्वनाथ धाम से भी इन मंदिरों को प्रति-उपहार अर्पित किए जा रहे हैं, जो सनातन परंपरा में पारस्परिक श्रद्धा और आध्यात्मिक बंधुत्व का प्रतीक है।

यह पहल “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को मूर्त रूप देती है और सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोकर वैश्विक आध्यात्मिक एकता को मजबूत करती है। महाशिवरात्रि पर शुरू हुई यह परंपरा काशी की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रही है और धार्मिक सद्भाव का नया अध्याय लिख रही है।

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