
ईरान युद्ध के तीसरे हफ्ते में अब ऊर्जा संसाधनों पर हमले तेज हो गए हैं। इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैसफील्ड पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर और यूएई की गैस सुविधाओं को निशाना बनाया। यह अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान युद्ध में एक खतरनाक बदलाव है, जहां अब ऊर्जा को हथियार बनाया जा रहा है।
बुधवार को पहली बार दोनों पक्षों ने जीवाश्म ईंधन से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए। इससे पहले 17 मार्च तक अमेरिका-इजराइल ने ईरान की ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं को निशाना बनाने से परहेज किया था। लेकिन इजराइल के साउथ पार्स हमले ने स्थिति बदल दी। ईरान ने जवाब में सऊदी अरब के अरामको रिफाइनरी समरेफ, कतर के रास लफ्फान एलएनजी और यूएई के हबशान गैस सुविधा पर मिसाइलें दागीं। अधिकांश मिसाइलें रोक ली गईं, लेकिन खतरा बढ़ गया है।
साउथ पार्स गैसफील्ड क्यों इतना महत्वपूर्ण?
दुनिया का सबसे बड़ा गैसफील्ड साउथ पार्स 1,800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस रखता है—पूरी दुनिया की 12-13 साल की जरूरत। ईरान की 80% बिजली इसी से बनती है। यह कतर के साथ साझा है (कतर में नॉर्थ फील्ड कहलाता है), जहां से दुनिया को बड़ा एलएनजी निर्यात होता है। हमले से तुरंत तेल-गैस कीमतें बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, गैस कीमतें 6% उछलीं। अमेरिका में पेट्रोल कीमतें 2023 के बाद सबसे ऊंची स्तर पर।
ट्रंप ने साउथ पार्स हमले से खुद को अलग बताया और कहा कि यह केवल इजराइल का ऑपरेशन था।
ईरान का जवाब और भारत पर असर
ईरान ने कतर के रास लफ्फान एलएनजी, यूएई के हबशान और बाब फील्ड को टारगेट किया। भारत दुनिया का बड़ा एलएनजी खरीदार है और 80-85% एलपीजी कतर व सऊदी से आता है। एलएनजी का इस्तेमाल उर्वरक संयंत्रों और शहर गैस नेटवर्क (PNG, CNG) में होता है। लंबे समय तक रुकावट से भारत की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।
यूएई ने ईरान के हमले को ‘आतंकवादी हमला’ करार दिया। ईरान ने सऊदी अरब की तेल-गैस सुविधाओं पर हमले की धमकी दी है।
वैश्विक प्रभाव और मरम्मत की चुनौती
ऊर्जा सुविधाओं पर हमले से मरम्मत में सालों लग सकते हैं। एनालिस्ट सॉल कावोनिक ने कहा कि एलएनजी सुविधा पर हमला सबसे खराब है—मरम्मत में कई साल लगेंगे। इतिहास में 2003 इराक युद्ध के बाद भी उत्पादन सामान्य होने में दो साल लगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले से बंद है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अब उत्पादन सुविधाएं भी निशाने पर हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबा असर पड़ेगा। युद्ध अब तीसरे हफ्ते में है और ऊर्जा ही युद्ध का मुख्य मैदान बन गया है।



