
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है।
यह फैसला उनके इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद आया। सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, जिसमें बरेली डिवीजन के कमिश्नर जांच अधिकारी होंगे। जांच पूरी होने तक अग्निहोत्री को सिर्फ subsistence allowance मिलेगा और वे शामली के DM ऑफिस से जुड़े रहेंगे।
अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दिया था। उन्होंने नए UGC इक्विटी रेगुलेशन्स 2026 को “काला कानून” बताया और आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेज-यूनिवर्सिटी में जाति-आधारित असंतोष बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं और ब्राह्मणों पर अत्याचार का खतरा पैदा कर सकते हैं।
इस्तीफा पत्र में उन्होंने लिखा कि सरकार की नीतियां समाज और राष्ट्र को बांट रही हैं, लोकतांत्रिक मूल्य कमजोर हो रहे हैं, इसलिए वे सिस्टम का हिस्सा नहीं रह सकते। उन्होंने UGC नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की।
अग्निहोत्री ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रयागराज में स्नान रोकने की घटना का भी जिक्र किया और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि DM आवास पर उनको 45 मिनट तक “बंधक” बनाकर रखा गया, अपशब्द कहे गए (“पंडित पागल हो गया है”) और रातभर रोकने की बात हुई। SSP के हस्तक्षेप पर रिहा हुए।
अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं। कानपुर निवासी, BHU से B.Tech और LLB, अमेरिका में काम कर चुके। पहले उनाव, बलरामपुर, लखनऊ में SDM रहे। सख्त और स्पष्टवादी स्टाइल के लिए जाने जाते हैं।
यह घटना UGC नियमों पर बढ़ते विवाद के बीच राजनीतिक-प्रशासनिक हलचल पैदा कर रही है।



