
फैटी लिवर (Fatty Liver) अब भारत में एक महामारी का रूप ले चुकी है। हाल की रिपोर्ट्स और रिसर्च (जैसे PIB 2024 और AIIMS स्टडी) के अनुसार, 35-38% भारतीयों में फैटी लिवर (NAFLD/MASLD) के मामले पाए जाते हैं।
यह बीमारी अब सिर्फ शराब से नहीं जुड़ी, बल्कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जिसे अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-असोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है, ज्यादा आम है।
यह समस्या शहरी जीवनशैली, मोटापा, डायबिटीज, सेडेंटरी जॉब्स और प्रोसेस्ड फूड से तेजी से बढ़ रही है। चौंकाने वाली बात: कई दुबले-पतले या दिखने में फिट लोग भी इससे पीड़ित हैं।
फैटी लिवर क्यों ‘खामोश बीमारी’ है?
शुरुआती स्टेज में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, क्योंकि लिवर में दर्द महसूस करने वाली नसें नहीं होतीं। जब लक्षण आते हैं, तब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। आम संकेत:
- लगातार थकान (आराम करने पर भी न जाए)
- पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द
- भूख कम लगना, मतली
- वजन अनियंत्रित बढ़ना या घटना
- पेट-कमर के आसपास चर्बी जमा होना
प्रमुख कारण
- ज्यादा मीठा, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड
- शारीरिक निष्क्रियता (घंटों बैठे रहना)
- मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल
- तनाव और अनियमित नींद
कैसे बचाव और सुरक्षित रखें लिवर?
फैटी लिवर का कोई जादुई दवा या डिटॉक्स सप्लीमेंट नहीं है। असली इलाज लाइफस्टाइल चेंज है:
- संतुलित डाइट: ज्यादा सब्जियां, फल, साबुत अनाज, प्रोटीन (दाल, अंडा, चिकन/फिश); चीनी और तेल कम करें।
- नियमित व्यायाम: रोज 30-45 मिनट वॉक, हफ्ते में 2-3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
- वजन कंट्रोल: 5-10% वजन कम करने से लिवर फैट काफी घट सकता है।
- शराब पूरी तरह छोड़ें, तनाव मैनेज करें (योग/मेडिटेशन)।
- नियमित जांच: अल्ट्रासाउंड या LFT टेस्ट से जल्दी पता चल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्टेज में पकड़ ली जाए तो यह पूरी तरह रिवर्स हो सकती है। अगर आपको डायबिटीज, मोटापा या थकान जैसी समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।


